'2020 तक 1 अरब डॉलर की कंपनी बनने का लक्ष्य'

अर्णव दत्ता |  May 18, 2018 09:49 PM IST

अमेरिका की प्रमुख अप्लायंस कंपनी व्हर्लपूल भारतीय बाजार में ऐसे समय में आक्रामक तरीके से अपना विस्तार कर रही है जब चीन की ड्यूरेबल्स कंपनियों की लहर बढ़ रही है। व्हर्लपूल ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक सुनील डिसूजा ने अर्णव दत्ता से बातचीत में कंपनी की योजनाओं और चुनौतियों के बारे में खुलकर चर्चा की। पेश हैं मुख्य अंश:

 
पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान व्हर्लपूल के राजस्व में दोगुना वृद्धि दर्ज की गई और वह 49 अरब रुपये अधिक राजस्व के साथ वित्त वर्ष 2017-18 को अलविदा किया। आगे के लिए आपकी कारोबारी रणनीति क्या है?
 
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के कारण शुरुआती झटकों के बाद कारोबार सुचारु रहा। दिसंबर तिमाही के दौरान हमने राजस्व में 20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। अब हम अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में विस्तार और खुदरा पहुंच बढ़ाने के लिए जबरदस्त काम कर रहे हैं। प्रीमियम और आम लोगों की श्रेणियों में हम अपने पोर्टफोलियो को मजबूत बना रहे हैं। हम यहां के प्रीमियम बाजार में आपूर्ति के लिए चीन में अपनी अतिरिक्त क्षमता का फायदा उठाएंगे। भारत में हमारी शाखाओं की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। 
 
आपका राजस्व लक्ष्य और निवेश योजनाएं क्या हैं?
 
हमारा दीर्घावधि लक्ष्य 2020 तक 1 अरब डॉलर (67 अरब रुपये) की कंपनी बनना है और उसके लिए हमें रह साल दो अंकों की वृद्धि के साथ आगे बढऩे की जरूरत है। अगले पांच साल के दौरान क्षमता विस्तार और नए उत्पादों के विकास पर हमने 4.3 अरब रुपये के निवेश की योजना बनाई है। हमारे पुडुचेरी संयंत्र का विस्तार अगले दो महीने में पूरा हो जाएगा जिसके लिए 60 से 70 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। इसके अलावा पुणे संयंत्र में दो चरणों के तहत विस्तार के लिए 3.6 अरब रुपये की जरूरत होगी।
 
क्या आपको घरेलू उपभोक्ता बाजार में सुधार के संकेत दिख रहे हैं?
 
हाल की तिमाहियों के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि करीब 7 फीसदी बरकरार रही है। पारंपरिक तौर पर 7 फीसदी की जीडीपी वृद्धि से भारत में विवेकाधीन खर्च में बढ़ोतरी होती है। यह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स बाजार के लिए एक अच्छा संकेत है। हालांकि शहरी क्षेत्रों की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है लेकिन छोटे शहरों और कस्बों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ महीने के दौरान अच्छी वृद्धि दिखी है। साथ ही औद्योगिक गतिविधियों के मुकाबले कृषि पर निर्भर राज्यों ने वृद्धि के बेहतर आंकड़े दिए हैं।
 
क्या लागत पर किसी तरह का दबाव दिख रहा है? ड्यूरेबल्स बाजार में मूल्य वृद्धि के क्या आसार दिख रहे हैं?
 
तेल कीमतों में तेजी चिंताजनक है क्योंकि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है। इससे अंतत: मुद्रास्फीतिक दबाव बढ़ता है जो कारोबार के लिए अच्छा नहीं होता। एक अमेरिकी कंपनी होने के नाते रुपये में गिरावट भी हमारे लिए चिंताजनक है क्योंकि अधिकतर कलपुर्जों का अभी भी आयात करना पड़ता है। उद्योग में दो बार उत्पादों के दाम पहले ही बढ़ाए जा चुके हैं। पहली बार (जुलाई में) जीएसटी के लागू होने के बाद और दूसरी बार दिसंबर (2017) तिमाही में। अब रेसिन और प्लास्टिक जैसी तमाम वस्तुओं के दाम बढ़ रहे हैं। इस्पात की कम आपूर्ति हो रही है जो हमारे लिए एक सिरदर्द है। यदि यही चलन बरकरार रहा तो जल्द ही हमें तीसरी बार कीमत बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कीवर्ड Whirlpool Corporation, america,

  
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