लाभांश प्रतिफल निचले स्तर पर

कृष्ण कांत | मुंबई May 21, 2018 09:40 PM IST

वित्तीय नतीजों की घोषणा कर चुकीं सूचीबद्ध कंपनियों के लाभांश पिछले एक साल के दौरान उनके शेयर मूल्य में तेजी के मुकाबले काफी कम रही है। परिणामस्वरूप लाभांश प्रतिफल अब 1.1 फीसदी पर 10 साल के निचले स्तर तक लुढ़क चुका है जबकि 2016-17 के अंत में यह आंकड़ा 1.44 फीसदी और दो साल पहले 1.5 फीसदी रहा था। पिछले तीन साल के दौरान पहली बार सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर मूल्य में तेजी के बावजूद उनके लाभांश भुगतान की रफ्तार सुस्त रही। कंपनियों ने पूरे वित्त वर्ष 2017-18 के लिए अपने नतीजों की घोषणा करते हुए अब तक 930.6 अरब रुपये के लाभांश की घोषणा की है जो वित्त वर्ष 2016-17 में उनके द्वारा भुगतान किए गए 959.4 अरब रुपये के लाभांश के मुकाबले कम है। टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस) जैसी लाभांश भुगतान करने वाली कुछ बड़ी कंपनियां साल के दौरान कई बार अंतरिम लाभांश का भुगतान करती हैं।  हमारे आंकड़ों में कंपनियों द्वारा 2017-18 के लिए भुगतान किए गए कुल लाभांश को शामिल किया गया है।
 
साल 2017-18 के दौरान 538 सूचीबद्ध कंपनियों के एकीकृत लाभांश भुगतान में पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान इसमें 19 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके मुकाबले मार्च 2017 में समाप्त वर्ष के दौरान इन कंपनियों का एकीकृत बाजार पूंजीकरण 26 फीसदी बढ़कर 17 मई 2018 के कारोबारी सत्र के अंत में 83.65 लाख करोड़ रुपये हो गया। विश्लेषकों का कहना है कि इससे कंपनियों के शेयर मूल्य में तेजी और शेयरधारकों की लाभांश आय में काफी अंतर पैदा हो गया है। साल 2014-15 से लेकर 2016-17 के दौरान लाभांश भुगतान की रफ्तार काफी हद तक शेयर मूल्य में तेजी के अनुरूप रही। यही कारण है कि इस दौरान लाभांश प्रतिफल में लगभग स्थिर रहा। उदाहरण के लिए, साल 2016-17 के दौरान लाभांश भुगतान में 19 फीसदी की वृद्धि हुई थी जबकि साल के दौरान कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में 23 फीसदी का इजाफा हुआ था। इससे एक साल पहले लाभांश और बाजार पूंजीकरण दोनों में एक साल पहले के मुकाबले 3 फीसदी की गिरावट आई थी।
 
कुल मिलाकर पिछले तीन साल के दौरान शेयरधारकों की लाभांश आय में सालाना 3.7 फीसदी की चक्रवृद्धि दर के साथ बढ़ोतरी हुई। जबकि इस दौरान कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में सालाना आधार पर 14.5 फीसदी की वृद्धि हुई। लाभांश आय में वृद्धि यदि इसी रफ्तार के साथ बरकरार रही तो शेयरधारकों को मौजूदा बाजार मूल्य पर लाभांश आय के जरिये अपने निवेश की वसूली करने में करीब 60 वर्ष लग जाएंगे। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, 'सूचीबद्ध कंपनियों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऐतिहासिक तौर पर बड़े लाभांश प्रदाता रहे हैं लेकिन अधिकतर बैंकों ने 2017-18 के दौरान भारी घाटे के मद्देनजर लाभांश न देने का निर्णय लिया।' भारतीय उद्योग जगत के शीर्ष 10 लाभांश प्रदाताओं में से तीन ने 2017-18 के लिए अपने लाभांश भुगतान में कटौती की है। हिंदुस्तान जिंक के लाभांश भुगतान में पिछले साल के मुकाबले 73 फीसदी की कमी दर्ज की गई। कंपनी ने 2016-17 में विशेष लाभांश का भुगतान किया था लेकिन 2017-18 में ऐसा कुछ नहीं दिखा। 
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