यूटीआई एमएफ के एमडी पर बढ़ा विवाद

श्रीमी चौधरी | मुंबई May 21, 2018 09:40 PM IST

यूटीआई म्युचुअल फंड के प्रमुख अंशधारकों के बीच जारी तनाव के बीच सबसे बड़े शेयरधारक टी रोवे प्राइस ग्रुप ने निदेशक मंडल के कामकाज पर एतराज जताया है। सूत्रों के मुताबिक टी रोवे प्राइस ने वित्त मंत्रालय और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को लिखी एक कड़ी चि_ïी में कहा है कि निदेशक मंडल यूटीआई एमएफ का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने में जानबूझकर देर करने की कोशिश कर रहा है। इस फंड हाउस ने इस मामले में सरकार से फौरन दखल देने और कदम उठाने की गुहार लगाई है। 
 
इस चि_ïी में टी रोवे प्राइस ने कहा है कि प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी लियो पुरी का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए। फंड हाउस का मानना है कि यूटीआई एसेट मैनेजमेंट कंपनी के शीर्ष नेतृत्व में निरंतरता कायम रहना आईपीओ लाने की योजना के लिहाज से जरूरी है। पुरी का पांच साल का कार्यकाल अगस्त में पूरा होने जा रहा है।  टी रोवे प्राइस के प्रवक्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में ताजा घटनाक्रम की पुष्टि की है। प्रवक्ता ने कहा, 'यूटीआई के नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने के लिए निदेशक मंडल कोई कदम नहीं उठा रहा है जिससे हम निराश हैं। भारतीय अंशधारक भी सेबी के 10 फीसदी वाले नियम का ठीक से पालन नहीं कर रहे हैं।'
 
यूटीआई एमएफ में 26 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी टी रोवे प्राइस ने यूटीआई एमएफ में हितों के टकराव का मुद्दा भी उठाया है। वह चाहती है कि सेबी घरेलू शेयरधारकों की तरफ से नियुक्त स्वतंत्र निदेशकों पर भी गौर करे। अमेरिका स्थित इस कंपनी ने कहा है कि यूटीआई एएमसी और इसके अंशधारकों के हितों को संरक्षित करने के लिए सशक्त प्रबंधन एवं कंपनी प्रशासनजरूरी है।  कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'इस तरह आईपीओ लाने की योजना पर आगे बढऩे में भी सहूलियत होगी। लियो पुरी ने वर्ष 2013 में कंपनी का प्रबंध निदेशक बनने के बाद से ही यूटीआई का कामकाज बखूबी संभाला है। हम चाहते हैं कि उन्हें आगे भी इसी भूमिका में बनाए रखा जाए।'
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