उतार-चढ़ाव के बीच शेयर की लक्षित कीमतों में कटौती

पवन बुरुगुला | मुंबई May 23, 2018 10:08 PM IST

आर्थिक हालात में गिरावट और आय में कमजोरी ने ब्रोकरेज फर्मों को स्मॉलकैप व मिडकैप शेयरों की लक्षित कीमतों में कमी लाने के लिए प्रोत्साहित किया है। बीएसई-500 में शामिल तीन चौथाई से ज्यादा शेयरों की लक्षित कीमतें पिछले तीन महीने में घटी है और 98 शेयरों में 10 फीसदी से ज्यादा की कमी की गई है। बीएसई मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांकों के मामले में भी यही प्रवृत्ति नजर आ रही है, जहां ज्यादातर शेयरों की लक्षित कीमतें घटाई गई हैं। लक्षित कीमतों में कटौती ऐसे समय में हुई है जब इन शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव है। ब्रोकरेज कंपनियां अपने क्लाइंटों को लगातार सलाह दे रही है कि वह मिडकैप शेयरों में नई खरीदारी न करें जबकि इस श्रेणी में कई शेयर साल 2017 के अपने सर्वोच्च स्तर से काफी नीचे आ गए हैं।
 
छोटे शेयरों में बिकवाली का दबाव तब देखने को मिला जब बाजार के सूचकांकों ने लगातार तीन साल तक सेंसेक्स के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। साल 2018 में अब तक बीएसई 500, बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है जबकि सेंसेक्स एक फीसदी टूटा है। विश्लेषकों ने कहा, आय के मोर्चे पर निराशा और कमजोर वैश्विक संकेतों ने ब्रोकरेज कंपनियों के अपने रुख में बदलाव के लिए प्रोत्साहित किया है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (रणनीति) विनोद कार्की ने कहा, फरवरी में वैश्विक पूंजी बाजारों में उतारचढ़ाव में हुई बढ़ोतरी के ब ाद लार्जकैप व मिडकैप के प्रदर्शन का अंतर साल 2017 की शुरुआत के मुकाबले घटकर शून्य पर आ गया। मिडकैप में गिरावट ने भी मिडकैप व लार्जकैप के बीच मूल्यांकन का अंतर कम कर दिया।
 
बैंंकिंग क्षेत्र के शेयरों को लक्षित कीमतों में कटौती का सबसे ज्यादा झटका लगा है। आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब नैशनल बैंक की लक्षित कीमत पिछले तीन महीने में 46 फीसदी घटी है। इलाहाबाद बैंक व आन्ध्रा बैंक की कीमतों में भी क्रमश: 42 व 34 फीसदी की कटौती की गई है। गिरावट के मौजूदा दौर की शुरुआत मध्य जनवरी में हुई थी जब निवेशकों ने वैश्विक बिकवाली को देखते हुए मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में अपना निवेश घटाना शुरू किया था। गिरावट की शुरुआत अमेरिकी बाजारों में बॉन्ड के बढ़ते प्रतिफल के चलते हुई थी। मिडकैप शेयरों में दबाव चार महीने तक बना रहा।
 
इस क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा बढ़ोतरी को लेकर विश्लेषक लगातार चेतावनी देते रहे हैं। कई मिडकैप शेयर आय में बिना किसी बड़े सुधार के कई गुना चढ़ गए। सर्वोच्च स्तर पर बीएसई मिडकैप इंडेक्स 45 गुने पीई पर ट्रेडिंग कर रहा था जबकि सेंसेक्स 23-25 गुने पीई पर। स्मॉलकैप का प्रीमियम ज्यादा था क्योंकि उनका पीई गुणक 70 गुना था। एएसके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के मुख्य निवेश अधिकारी प्रतीक अग्रवाल ने कहा, किसी शेयर में टिकाऊ तेजी के लिए आय का मजबूत होना जरूरी होता है। मिडकैप व स्मॉलकैप की मौजूदा गिरावट मोटे तौर पर इन कंपनियों की तरफ से पेश कमजोर आय के चलते है। हालांकि कुछ मिडकैप कंपनियां हैं जिसने मजबूत आय दर्ज की है। निवेशकों के ऐसे शेयर चुनने चाहिए।
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