अल्पावधि में बढ़ेगा जेट का कर्ज

अनीश फडणीस | मुंबई May 24, 2018 09:47 PM IST

जेट एयरवेज को लगता है कि अगली एक या दो तिमाही में इसके कर्ज का स्तर बढ़ेगा क्योंकि बढ़ती लागत इसके नकदी प्रवाह पर विपरीत असर डाल रहा है। विमानन कंपनी का सकल कर्ज मार्च के आखिर में 84.24 अरब रुपये था। आज आयोजित कॉन्फ्रेंस कॉल में कंपनी के डिप्टी सीईओ अमित अग्रवाल ने कहा, एक या दो तिमाही में हमारे कर्ज का स्तर बढ़ेगा। यह अल्पावधि की परेशानी होगी। अग्रवाल ने कहा, पिछले तीन सालों में विमानन कंपनी ने अपने कर्ज में करीब 30 अरब की कमी लाई है और इसे घटाने की कोशिश हो रही है। जेट के 84.24 अरब रुपये के कर्ज में 20.54 अरब रुपये का कर्ज विमान के अधिग्रहण का कर्ज है और करीब 65 फीसदी डॉलर वाला कर्ज है।
 
जेट एयरवेज ने वित्त वर्ष 2018 की चौथी तिमाही में 10.40 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया है, जिसकी वजह उच्च लागत और अन्य आय में गिरावट है। इसमें इंजन ओवरहॉल की 2.53 अरब रुपये की लागत शामिल है, जिसके बारे में विमानन कंपनी का कहना है कि यह आवर्ती प्रकृति की है। विमानन कंपनी की हैसियत नकारात्मक है और ऑडिटर ने इस पर चिंता जताई है। विमानन कंपनी का शेयर कमजोर नतीजे के चलते आज 7 फीसदी टूटकर 391.55 रुपये का रह गया। जेट के प्रबंधन ने हालांकि कहा कि इसकी गैर-र्ईंधन लागत घटाने की योजना पटरी पर है और इसका इरादा अपने नेटवर्क को दोबारा डिजाइनिंग के जरिए और एनालिटिक्स के इस्तेमाल से राजस्व को अधिकतम करने का है। विमानन कंपनी ने विमानन किराए में बदलाव का संकेत दिया, जो पिछले दो सालों से स्थिर बना हुआ है। इसकी क्षमता में हालांकि 10.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यात्रियों की संख्या 11.8 फीसदी बढ़ी है, पर कुल राजस्व महज 8.1 फीसदी बढ़ा है क्योंकि औसत राजस्व प्रति यात्री एक फीसदी घटा है।
 
विमानन कंपनी आगामी महीनों में वैश्विक स्तर पर र्ईंधन की कीमत व विमानन किराए में संतुलन की उम्मीद कर रही है, लेकिन इसने यह नहीं बताया कि भारत में कब किराया बढ़ सकता है और कितना। मुख्य कार्याधिकारी विनय दुबे ने संकेत दिया कि विमानन कंपनी ईंधन की उच्च लागत का भार यात्रियों पर डालने में सक्षम होगी क्योंकि इसके ट्रैफिक में कॉरपोरेट यात्रियों की हिस्सेदारी ज्यादा है, जो कीमत के मामले में दूसरी श्रेणी के यात्रियों के मुकाबले कम संवेदनशील होते हैं। दुबे ने कहा, एयरफ्रांस-केएलएम के साथ हमारी नई साझेदारी के परिणाम मिल रहे हैं और इससे मुंबई-पैरिस मार्ग पर प्रीमियम कैबिन में यात्रियों की संख्या 18 फीसदी बढ़ी है।
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