पिछले साल से ज्यादा एनसीडी जारी होंगे इस साल

अनूप रॉय | मुंबई May 30, 2018 09:32 PM IST

इस साल रिकॉर्ड खुदरा बॉन्ड जारी हो सकते हैं क्योंकि गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को रकम जुटाने के पारंपरिक स्रोत बैंकों से रकम जुटाने में मुश्किल हो रही है। इक्रा रेटिंग्स के मुताबिक, इस साल खुदरा गैर-परिवर्तनीय ऋणपत्र के जरिए जुटाई जाने वाली रकम 2013-14 के पिछले रिकॉर्ड 423.83 अरब रुपये को पीछे छोड़ सकती है। उस साल सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों ने 330 अरब रुपये के करमुक्त बॉन्ड जारी किए थे। तब से करमुक्त बॉन्ड जारी नहीं हुए हैं। इस साल सरकार ने करमुक्त बॉन्ड जारी करने का ऐलान नहीं किया है। इक्रा ने कहा, पहली तिमाही में ही ऐसे बॉन्ड 200 अरब रुपये के पार निकल सकते हैं, जो पिछले साल के 47 अरब रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है।

 

एकल आधार पर एनबीएफसी समूहों ने 2016-17 के दौरान रिकॉर्ड 293 अरब रुपये के खुदरा बॉन्ड जारी किए थे और ये बॉन्ड मुख्य रूप से पहली छमाही में जारी हुए थे। हालांकि दूसरी छमाही में हुई नोटबंदी से नकदी की भरमार हो गई, बॉन्ड का प्रतिफल कम हुआ और रकम जुटाने के लिए एनबीएफसी ऋण प्रतिभूतियों के निजी नियोजन के लिए बाध्य हुए थे। एनबीएफसी की तरफ से खुदरा ऋणपत्र आमतौर पर वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में जारी होते रहे हैं। लेकिन इस साल कंपनियों ने पहली तिमाही में ही बाजार से रकम जुटाना शुरू कर दिया। मई में डीएचएफएल ने खुदरा बॉन्ड के जरिए 120 अरब रुपये जुटाए जबकि जेएम फाइनैंशियल क्रेडिट सॉल्युशंस की योजना 7.5 अरब रुपये जुटाने की है। ऐसे बॉन्डों पर 9 फीसदी से ज्यादा ब्याज की पेशकश की गई है।

 

इक्रा ने एक रिपोर्ट में कहा, बैंक जमाओं पर ब्याज दरों में सीमित बढ़ोतरी और ऋण व इक्विटी बाजार में रिटर्न में उतारचढ़ाव के बीच आकर्षक रिटर्न को देखते हुए निवेशकों की बेहतर रुचि रही। रेटिंग एजेंसी ने कहा, अतिरिक्त नकदी में कमी और बॉन्डों के बढ़ते प्रतिफल के चलते एनबीएफसी को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए 2018-19 में खुदरा बॉन्ड बाजार का सहारा लेना पड़ सकता है। क्योंकि बैंंकिंग क्षेत्र व विदेशी उधारी के साथ चुनौतियां जुड़ी हुई है। जो कंपनियां खुदरा बॉन्ड जारी कर रहे हैं उनकी रेटिंग एए और इससे ऊपर है, जो खुदरा निवेशकों के बीच भरोसा पैदा कर सकती है। 

 

पारंपरिक रूप से एनबीएफसी समूह को बैंक सबसे ज्यादा रकम मुहैया कराता रहा है। 2017-18 की तीसरी तिमाही में बॉन्ड प्रतिफल सख्त होने के साथ एनबीएफसी की उधारी की मांग बैकिंग चैनल की ओर आ गई। इसके परिणामस्वरूप बैंकों की एनबीएफसी पर उधारी 2017-18 के आखिर में 4.96 लाख करोड़ रुपये थी जबकि 22 दिसंबर 2017 को यह 3.68 लाख करोड़ रुपये रही थी।
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