एनसीएलटी जाएगी मुंद्रा पावर!

विनय उमरजी | अहमदाबाद May 31, 2018 09:46 PM IST

समाधान की तलाश

आरबीआई की अधिसूचना के तहत समाधान के लिए अगस्त तक का है वक्त
आरबीआई के दिशानिर्देश से मुंद्रा बिजली संयंत्र इसके दायरे में आ गई
अदाणी के मुंद्रा बिजली संयंत्र पर लेनदारों का 220 अरब रुपये है बकाया

राज्य की बिजली वितरण कंपनी गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (जीयूवीएनएलएल) के साथ हिस्सेदारी बिक्री पर बातचीत से भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले लेनदारों के हाथ खींच लेने के बाद अदाणी पावर लिमिटेड की सहायक अदाणी पावर मुंद्रा अब नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) का दरवाजा खटखटा सकती है। बढ़ती लागत के बीच बिजली खरीद समझौता लागू करने नाकाम रहने के बाद अदाणी पावर ने टाटा पावर व एस्सार पावर संग गुजरात सरकार की बिजली वितरण कंपनी जीयूवीएनएल के साथ 1 रुपये की टोकन मनी में अपने पारंपरिक बिजली संयंत्र की 51 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए बातचीत शुरू की थी।

जीयूवीएनएल के एक अधिकारी ने कहा, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन समझा जाता है कि लेनदारों ने हिस्सेदारी बिक्री की बातचीत से हाथ खींच लिया है। इस मामले में अदाणी पावर को अपना बकाया निपटाने के लिए उचित विकल्प की ओर देखना होगा और हमारे साथ बिजली खरीद समझौते को लागू करना होगा, जिनमें एनसीएलटी की कार्यवाही शामिल हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, यह कदम फरवरी में भारतीय रिजर्व बैंंक की तरफ से दबाव वाली परिसंपत्तियों की पहचान के लिए संशोधित दिशानिर्देश आने की पृष्ठभूमि में उठाया गया, जिसने 4260 मेगावॉट वाले मुंद्रा बिजली संयंत्र को इसके दायरे में ला दिया।

गुजरात सरकार के एक अधिकारी ने कहा, एसबीआई की अगुआई में लेनदार अब हिस्सेदारी बिक्री पर आगे नहीं बढऩा चाहते क्योंकि आरबीआई ने दिशानिर्देश में बदलाव कर दिया है। इसके चलते अदाणी पावर अन्य विकल्प पर विचार कर सकती है। दिवालिया संरक्षण के लिए अदाणी पावर के एनसीएलटी जाने के कयास इसलिए भी तेज हो गए हैं कि आरबीआई के परिपत्र में 1 मार्च 2018 या इसके बाद 20 अरब रुपये या इससे ज्यादा कर्ज वाले खातों का निपटान एनसीएलटी की तरफ से क्रियान्वित समाधान योजना के जरिए कराना अनिवार्य कर दिया है।

अदाणी के मुंद्रा बिजली संयंत्र पर 220 अरब रुपये से ज्यादा बकाया है। जब एनसीएलटी में याचिका दाखिल की जाएगी तब एनसीएलटी पहुंचने वाली यह अदाणी समूह की पहली परिसंपत्ति होगी। इसके अलावा अदाणी पावर लिमिटेड संशोधित वित्तीय नियमों के बीच अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य हुई है। र्ईंधन की बढ़ती लागत, देसी कोयले की किल्लत और हाल में हुए वित्तीय नियमों में संशोधन आदि से मुंद्रा परियोजना समेत आईपीपी की कई बिजली परियोजनाएं व्यावहारिक बने रहने की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। अदाणी के प्रवक्ता ने कहा, अदाणी पावर में हम मुंद्रा परियोजना की चुनौतियों के समाधान के लिए हितधारकोंं के साथ काम कर रहे हैं, जो उपभोक्ताओं व राष्ट्र के हित में होगा। इसके मुताबिक बिजली खरीद वाले राज्यों व लेनदारों के साथ मिलकर विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया है।

बढ़ती ईंधन लागत की वसूली न होने पर परिचालन नुकसान हुआ और यह गुजरात बिजली वितरण कंपनी के साथ बिजली खरीद समझौता लागू नहीं कर पाई जबकि टाटा पावर की सीजीपीएल र्ईंधन लागत घटाने के लिए कदम उठाने के बाद बिजली आपूर्ति में सक्षम रही। इसके संयंत्र का लोड फैक्टर वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में पिछले साल के 73 फीसदी से घटकर 37 फीसदी रह गया। अदाणी पावर जीयूवीएनएल को नाममात्र की बिजली आपूर्ति कर पा रही है। आरबीआई की अधिसूचना के तहत लेनदारों के साथ हुए डिफॉल्ट के लिए समाधान योजना लाने की खातिर अदाणी पावर के पास अगस्त तक का वक्त है।
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