छोटे-मझोले शेयरों के हिचकोले

जश कृपलानी | मुंबई Jun 05, 2018 09:45 PM IST

नियामक की तरफ से सटोरियों पर नकेल कसे जाने से छोटे एवं मझोले शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी जा रही है। मंगलवार को निफ्टी स्मॉल-कैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांकों में लगातार छठे दिन गिरावट देखी गई। इन दोनों सूचकांकों में क्रमश: 8 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत गिरावट देखी गई। दूसरी तरफ निफ्टी 50 में में महज 1 प्रतिशत गिरावट देखी गई। 

कारोबारियों का कहना है कि संचालन एवं वित्तीय कदाचार संबंधी नकारात्मक खबरों से पिछले एक सप्प्ताह में मिड-कैप शेयरों में बिकवाली बढ़ी है। कारोबारियों के अनुसार मार्च तिमाही में शानदार आय और बड़े शेयरों के मूल्यांकन में मजबूती से भी मझोले शेयरों को लेकर निवेशकों का रुख कमजोर हुआ। कई निवेशकों ने अब छोटी कंपनियों के शेयरों पर दांव खेलने शुरू कर दिए हैं।

ब्रोकरों का कहना है कि हालिया गिरावट के मद्देनजर कारोबारियों के पास रुख बदलने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं रह गया है। निफ्टी स्मॉल-कैप सूचकांक जनवरी के अपने सर्वश्रेष्ठï स्तर से 24 प्रतिशत तक नीचे लुढ़क गए हैं। इसी तरह, निफ्टी स्मॉल-कैप सूचकांक में तेजी से फिसल रहा है और इस साल के शुरू के उच्चतम स्तर से यह 16.3 प्रतिशत नीचे आ चुका है। इसकी तुलना में निफ्टी 50 सूचकांक अपने शीर्ष स्तर से 5 प्रतिशत से भी कम फिसला है।

कारोबारियों का कहना है कि म्युचुअल फंडों के वर्गीकरण पर भारतीय प्रतिभूति एवं नियामक बोर्ड (सेबी) के नए नियमों एवं एक्वचेंजों द्वारा कारोबार पर सख्ती किए जाने से भी बिकवाली की आग को हवा मिली। पिछले दो महीने के दौरान एनएसई और बीएसई ने सटोरिया कारोबार पर नकेल कसने के लिए अब तक 100 शेयरों को तथाकथित गे्रडेड सर्विलांस मेकेनिज्म (जीएसएम) में भेज दिया है।

विदेशी ब्रोकरेज कंपनी यूबीएस का कहना है कि छोटे एवं मझोले शेयरों में गिरावट जारी रहेगी। यूबीएस सिक्योरिटी में भारत के लिए शोध प्रमुख गौतम छौछडिय़ा ने कहा, 'मूल्यांकन के लिहाज से काफी कम राहत है। शेयर कीमतों को मजबूती देने वाले म्युचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेस से निवेश भी कम हो रहा है।'

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