लेनदारों ने पतंजलि व अदाणी को संशोधित बोली लगाने को कहा

अद्वैत राव पलेपू | मुंबई Jun 05, 2018 09:52 PM IST

रुचि सोया के लेनदारों ने पतंजलि आयुर्वेद और अदाणी विल्मर को संकटग्रस्त फर्म की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण के लिए संशोधित बोली जमा कराने को कहा है।  एक सूत्र ने बिजनेस स्टैंडर्ड को इसकी पुष्टि की। पहले दौर की बोली में पतंजलि ने रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए 43 अरब रुपये की पेशकश की थी, जो अदाणी विल्मर की 33 अरब रुपये की पेशकश के मुकाबले करीब 30 फीसदी ज्यादा थी। यह हालांकि दूसरे दौर की बोली का आमंत्रण नहीं है क्योंकि इसके लिए दूसरी कंपनियों से भी नई बोली मंगानी होगी। इसके बजाय पतंजलि व अदाणी विल्मर को आईबीसी के नियमों व प्रक्रियाओं के अनुपालन के साथ संशोधित बोली जमा कराने को कहा गया है।
 
खाद्य तेल उत्पादक रुचि सोया के ऊपर वित्तीय लेनदारों का करीब 120 अरब रुपये बकाया है और दिसंबर 2017 में इसे आईबीसी के तहत दिवालिया समाधान के दायरे में लाया गया था। पिछले हफ्ते लेनदारों की समिति ने बोली खोली थी तब पतंजलि पहले दौर की बोली में सबसे बड़ी बोलीदाता के तौर पर उभरी। दो कंपनियां हालांकि रुचि सोया के अधिग्रहण की दौड़ में सबसे आगे दिखी, लेकिन रिपोर्ट बताती है कि पतंजलि के साथ गठजोड़ के जरिए गोदरेज एग्रोवेट इस कंपनी के लिए बोली लगा सकती है।
 
अगर बोली कामयाब रहती है तो पतंजलि की योजना रुचि सोया की पाम तेल प्लांटेशन परिसंपत्तियों को बाहरी खरीदार मसलन गोदरेज एग्रोवेट को बेचने की है, जिसके पास देश में 61,700 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में प्लांटेशन है और यह कच्चा पाम तेल, कच्चा पाम कर्नल ऑयल आदि का उत्पादन करती है। इंदौर की यह कंपनी अग्रणी ब्रांडों मसलन न्यूट्रिला, महाकोश, सनरिच, रुचि स्टार और रुचि गोल्ड के जरिए तेल का विपणन करती है। इन सभी ब्रांडों की खासी बाजार हिस्सेदारी है। सोया आधारित फूड के क्षेत्र में न्यूट्रिला की बाजार हिस्सेदारी 50 फीसदी बताई जाती है। इसके अलावा कंपनी का करीब 11,000 हेक्टेयर क्षेत्र में पाम का प्लांटेशन है। मंगलवार को एनसीएलटी के मुंबई पीठ ने आईसीआईसीआई बैंक को निर्देश दिया कि वह 48 करोड़ रुपये की डेबिट एंट्री को पलट दे, जो इसने रुचि सोया के चालू खाते से की थी।
कीवर्ड Adani, patanjali,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक