वीडियोकॉन के खिलाफ लेनदारों की याचिका स्वीकार

देव चटर्जी | मुंबई Jun 06, 2018 09:49 PM IST

नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के मुंबई पीठ ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के खिलाफ लेनदारों की दिवालिया याचिका स्वीकार कर ली क्योंकि कंपनी 210 अरब रुपये का कर्ज चुकाने में नाकाम रही। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से दिवालिया संहिता के तहत कर्ज समाधान वाली कंपनियों की दूसरी सूची में वीडियोकॉन को शामिल किए जाने के बाद लेनदारों ने कंपनी के खिलाफ मामले की शुरुआत की। वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज का कुल एकीकृत कर्ज 440 अरब रुपये है, लेकिन लेनदार इसकी विदेशी इकाई को दिवालिया अदालत नहीं ले गए हैं क्योंकि वह अभी भी अपने कर्ज का पुनर्भुगतान कर रही है। वीडियोकॉन का करीब आधा कर्ज इसकी विदेशी इकाई का है।
 
कर्ज समाधान के लिए पहचाने जाने के तुरंत बाद वीडियोकॉन ने भारतीय स्टेट बैंक व आरबीआई के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां तब से मामला लंबित है। इस बीच, बैंकों ने कंपनी का फॉरेंसिक ऑडिट करवाया, जिसने उसे क्लीन चिट दे दी। इस बारे में वीडियोकॉन के अधिकारियों की टिप्पणी नहीं मिल पाई। पहले वीडियोकॉन ने लेनदारों को वैश्विक परिसंपत्तियां बेचकर देसी कर्ज चुकाने की पेशकश की थी। कंपनी ने कहा कि इसका विदेशी कर्ज को वैश्विक तेल परिसंपत्तियों का समर्थन है और यह आईबीसी की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है और इसे विदेशी कर्ज के भुगतान में किसी तरह की समस्या नहीं दिख रही है। कंपनी को साल 2017 की शुरुआत में देना बैंक ने एनपीए घोषित किया था, जिसके बाद इसके शेयर काफी ज्यादा टूटे थे। वीडियोकॉन का शेयर बुधवार को बीएसई पर 9 रुपये पर बंद हुआ।
 
कर्ज चुकाने के लिए पिछले दो सालों में वीडियोकॉन ने केनस्टार ब्रांड की बिक्री एवरस्टोन कैपिटल को की। समूह ने बैंकों को आश्वस्त किया है कि वह कर्ज चुकाने के लिए अपनी जमीन बेचेगी। फोर्ट मुंबई में कंपनी का मुख्यालय था जिसे पिछले साल 3 अरब रुपये में बेचा था और अब यह टाटा समूह का अस्थायी मुख्यालय है।
कीवर्ड Videocon, NCLT,

  
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