सेबी ने सस्ती डायरेक्ट फंड योजनाओं पर दिया जोर

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Jun 06, 2018 09:51 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्ïस इन इंडिया (एम्फी) से अपने निवेशक जागरूकता कार्यक्रमों के तहत डायरेक्ट प्लान को बढ़ावा देने को कहा है। डायरेक्ट फंड योजनाएं निवेशकों को वितरकों से बचने और कमीशन बचाने का मौका देती हैं। इनमें रेग्युलर प्लान की तुलना में नेट ऐसेट वैल्यू (एनएवी) ऊंची होती है और खर्च अनुपात भी कम रहता है। निवेशक रेग्युलर इक्विटी योजनाओं की तुलना में डायरेक्ट इक्विटी योजनाओं में 80-100 आधार अंक तक की बचत कर सकते हैं। 
 
अप्रैल तक म्युचुअल फंड सेक्टर की 40.5 प्रतिशत परिसंपत्तियां डायरेक्ट योजनाओं के जरिये हासिल हुई थीं। डायरेक्ट निवेश का बड़ा हिस्सा गैर-इक्विटी आधारित योजनाओं में रहा जिसमें संस्थागत निवेशकों का दबदबा बना हुआ है। सूत्रों का कहना है कि बाजार नियामकों का मानना है कि डायरेक्ट-टू-रेग्युलर परिसंपत्ति समावेश से डायरेक्ट योजनाओं को मजबूती मिलने का अनुमान है।  'म्युचुअल फंड सही है' अभियान से दूर दराज के क्षेत्रों से बड़ी तादाद में नए निवेशकों को जोडऩे में मदद मिली है। इस अभियान का पहला चरण पिछले साल शुरू हुआ जिसमें फंडों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर ध्यान दिया गया था। 
 
अब तक डायरेक्ट योजनाओं, खासकर डेट योजनाओं की लोकप्रियता में संस्थागत निवेशकों का अहम योगदान रहा है। अनुमानों से पता चलता है कि 60 प्रतिशत से ज्यादा संस्थागत निवेशक अब डायरेक्ट रूट के जरिये निवेश करते हैं। वहीं लगभग 10 प्रतिशत व्यक्तिगत निवेशक डायरेक्ट विकल्प के जरिये निवेश करते हैं और अमीर निवेशकों की 18.5 प्रतिशत परिसंपत्तियां इस विकल्प के जरिये निवेश की जाती हैं। डायरेक्ट योजनाओं में अमीर निवेशकों के निवेश का आंकड़ा बढऩे की संभावना है। 
कीवर्ड sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),

  
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