एनपीए नियमों में बदलाव से ज्यादा खुश नहीं एमएसएमई

शुभायन चक्रवर्ती | नई दिल्ली Jun 07, 2018 09:54 PM IST

सरकार का मानना है कि सूक्ष्म, लघु  और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए एनपीए मानकों को आसान बनाए जाने से इस क्षेत्र को अधिक औपचारिक और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी, लेकिन स्वयं छोटी कंपनियां इसे लेकर आश्वस्त नहीं हैं। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को सभी एमएसएमई को बैंकों और एनबीएफसी से लिए गए अपने ऋणों को उन्हें फंसे कर्ज की श्रेणी में शामिल किए बगैर आखिरी तारीख निकल जाने के बाद 180 दिन के अंदर चुकाने की अनुमति प्रदान की। इस कदम से छोटे व्यवसायियों को अपने ऋणों को फंसे कर्ज में तब्दील होने से बचाने में मदद मिल सकेगी और साथ ही उनका क्रेडिट प्रोफाइल भी मजबूत होगा।
 
एमएसएमई मंत्रालय के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा बैंकिंग मानकों में किसी ऋण को उस वक्त एनपीए घोषित कर दिया जाता है जब उसे 90 दिन के अंदर नहीं चुकाया गया हो। मौजूदा नकदी किल्लत की वजह से देश में बड़ी तादाद में एमएसएमई एनपीए की समस्या के शिकार होते हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार ऐसे व्यवसायियों के लिए ऋणों का बैंकिंग व्यवस्था में कुल ऋणों में लगभग 16-18 फीसदी का योगदान है और हम आरबीआई को भी इस तथ्य से अवगत करा चुके हैं।'
 
हालांकि कंपनियों का कहना है कि एमएसई के लिए ऋण पहुंच बढ़ाने के संबंध में कोई घोषणा नहीं की गई है। पॉलिसी ऐट फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल ऐंड मीडियम एंटरप्राइजेज के निदेशक देबाशिष बंद्योपाध्याय ने कहा, 'कर्ज लेना ज्यादा कठिन हो गया है। आरबीआई ने अपने स्वयं के आंकड़ों में कहा है कि पिछली चार तिमाहियों के दौरान एमएसएमई द्वारा ऋण उठाव स्थिर बना हुआ है या इसमें एक-चौथाई फीसदी तक की कमी आई है। मझोले आकार के उद्यमों की श्रेणी में भी ऋण उठाव पिछली 8 तिमाहियों में 1-2 प्रतिशत तक नीचे आया है।' आरबीआई के नए कदम से छोटे व्यवसायियों की स्थिति तेजी से नहीं सुधरेगी। उन्होंने कहा कि इसकी मुख्य वजह यह है कि यदि 30 लाख रुपये से अधिक की सीमा के संदर्भ में देखा जाए तो इनमें से ज्यादातर व्यवसायी अनौपचारिक क्षेत्र में हैं और उनके पास उचित बैंक खाता या पैन कार्ड भी नहीं है।  आरबीआई के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हमारे अनुमानों के अनुसार, एमएसएमई को दिए गए कुल ऋणों में फंसे कर्ज की भागीदारी मार्च 2016 में 7.55 प्रतिशत पर थी।'
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