फंसे कर्ज के पुनर्गठन का हल बताएगी समिति

भाषा | मुंबई Jun 08, 2018 09:43 PM IST

सरकार ने फंसे कर्ज वाले खातों के समाधान के लिए संपत्ति पुनर्गठन कंपनी के गठन के लिए सिफारिश देने के वास्ते एक समिति बनाने की घोषणा की है। यह समिति दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।  वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 21 बैंकों के साथ मुस्तैदी के साथ खड़ी है। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा कि पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) के गैर-कार्यकारी चेयरमैन सुनील मेहता की अगुआई वाली समिति दबाव वाले खातों के तेजी से समाधान के लिए संपत्ति पुनर्गठन कंपनी (एआरसी) या संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) के गठन के बारे में दो सप्ताह में सिफारिश देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि दबाव वाली जिन संपत्तियों की पहचान की गई है, उनमें से ज्यादातर एआरसी या एएमसी ढांचे के लिए उपयुक्त हो सकती हैं। साथ ही बैंक तेजी से निर्णय लेने तथा दबाव वाले खातों के पारदर्शी और तेजी से समाधान को लेकर बाहरी विशेषज्ञों के साथ निगरानी समिति के गठन पर विचार करेंगे। गोयल ने कहा कि बैठक में कर्ज प्रवाह तथा ऐसी व्यवस्था बनाने पर चर्चा हुई जिससे यह सुनिश्चित हो कि ईमानदार कर्जदारों को कर्ज लेने में कोई कठिनाई न हो।
 
उन्होंने साथ ही कहा कि अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए जोखिम को कम करने की आवश्यकता है। सभी बैंकों ने दबाव वाले खातों के तेजी से निपटान को लेकर व्यवस्था बनाने की इच्छा जताई। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों के निदेशक मंडल में खाली पड़े पदों को अगले 30 दिनों में भरा जाएगा।  वित्त मंत्री ने कहा कि बैठक में बैंकों की कामकाज की प्रक्रिया को मजबूत करने तथा फंसे कर्ज (एनपीए) की ईमानदारी से पहचान पर भी चर्चा हुई। गोयल ने कहा कि बैंकों की सभी व्यवस्थाओं को चुस्त दुरुस्त किया जाएगा और ग्राहकों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी। 31 मार्च 2018 तक सभी सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 9016.1 अरब रुपये पहुंच चुका था। बैंकों ने इसके लिए 2870.3 अरब रुपये का प्रावधान किया था और उनका शुद्घ एनपीए 4572.6 अरब रुपये था। 
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