लेनदारों का कानूनी खर्च भी देगी अल्ट्राटेक सीमेंट

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Jun 08, 2018 09:49 PM IST

दिवालिया प्रक्रिया का सामना कर रही बिनानी सीमेंंट की परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की खातिर अल्ट्राटेक सीमेंट लेनदारों व लेनदारों की समिति के कानूनी खर्च का वहन करने पर सहमत हो गई है। यह रकम उसकी खुद की कानूनी लागत से अलग है, जो बढ़ रही है। सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, अल्ट्राटेक की पेशकश की मंजूरी के दौरान लेनदारों ने बढ़ते कानूनी खर्च पर चिंता जताई थी और इसे वहन करने का भार अल्ट्राटेक पर डाल दिया था। इसके बाद अल्ट्राटेक थोड़ी बातचीत करने पर इस पर सहमत हो गई। सूत्रों ने कहा, लेनदारों ने कहा कि अगर सीओसी की मंजूर योजना को अल्ट्राटेक चुनौती नहींं देती तो दिवालिया प्रक्रिया समाप्त हो गई होती और कानूनी खर्च सीओसी के पूर्वानुमान के मुताबिक होता। लेकिन अल्ट्राटेक ने बिनानी सीमेंट के मामले को चुनौती दी और फर्म के अधिग्रहण पर व्यग्रता का प्रदर्शन किया, इसलिए मामला इतना लंबा खिंच गया।
 
उधर, पूर्व में सबसे बड़ी बोली लगाने वाली डालमिया भारत कंसोर्टियम कोई कसर नहीं छोडऩा चाहता और इसने एनसीएलटी, एनसीएलएटी और सर्वोच्च न्यायालय में कई आरोप लगाए। कंपनी के अधिकारियों ने संकेत दिया था कि वह तब तक लड़ेगी जब तक कि सर्वोच्च न्यायालय इसे कामयाब बोलीदाता के तौर पर पुर्नस्थापित न कर दे और बिनानी सीमेंट के मामले में एनसीएलटी के फैसले को पलट दे। इस बारे में अल्ट्राटेक के अधिकारियों से कोई टिप्पणी नहीं मिल पाई। सबसे बड़ी बोलीदाता के रूप में डालमिया भारत के चयन का विरोध करने के लिए अल्ट्राटेक के एनसीएलटी जाने से पहले बिनानी सीमेेंट के समाधान की लागत करीब 65 लाख रुपये थी, जो अप्रैल के मध्य में बढ़कर 80-90 लाख रुपये हो गई। सीओसी को अल्ट्राटेक की योजना पर विचार करने का आदेश एनसीएलटी के कोलकाता पीठ की तरफ से दिए जाने के समय समाधान की कुल लागत करीब 1 अरब रुपये पर पहुंच गई। सर्वोच्च न्यायालय व एनसीएलएटी में कानूनी संघर्ष की शृंखला के बाद एकीकृत समाधान लागत 1.3 अरब रुपये को छू गई है, जो बिनानी सीमेंट के समाधान के मामले को महंगे मामलों में से एक बनाती है।
 
सूत्रों ने कहा कि लेनदारों को भरोसा है कि इस मामले का अंतिम फैसला सर्वोच्च न्यायालय से आएगा और एनसीएलटी, एनसीएलएटी व सर्वोच्च न्यायालय को कानूनी संघर्ष की शृंखला का निपटान कर देना चाहिए।  इन तर्कों के आधार पर लेनदारों ने अल्ट्राटेक को अपनी पेशकश 15 करोड़ रुपये और बढ़ाने की सलाह दी ताकि सीओसी कानूनी लागत की भरपाई कर सके और फिर सभी लेनदारोंं के साथ साझा कर सके। डालमिया भारत कंसोर्टियम का विरोध करने वाले एक अन्य सूत्र ने कहा, यह अल्ट्राटेक के मामले को और मजबूत बनाता है क्योंकि सीओसी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अल्ट्राटेक के अग्रणी वकीलों से दिशानिर्देश मांग सकते हैं, ऐसे में तेजी से इसका समाधान हो सकता है।
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