बॉन्ड प्रतिफल 8 फीसदी के पार

अनूप रॉय | मुंबई Jun 08, 2018 09:49 PM IST

दस वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल सुबह के कारोबार में थोड़े समय के लिए 8 फीसदी के पार निकल गया, लेकिन वित्त मंत्री पीयूष गोयल द्वारा उच्च प्रतिफल पर चिंता जताए जाने की खबर आने के बाद यह गुरुवार के बंद स्तर के नीचे चला गया। प्रतिफल में बढ़ोतरी से हर किसी की लागत बढ़ गई। इस हफ्ते आरबीआई की तरफ से ब्याज दरें बढ़ाए जाने से काफी पहले ही विभिन्न बैंक उधारी दरों में इजाफा कर रहे हैं। प्रतिफल में बढ़ोतरी से कंपनियों व राज्यों के अलावा केंद्र की उधारी लागत बढ़ गई।

 
जब ब्याज की लागत बढ़ती है तो निवेश की गतिविधियों को झटका लगता है। सूत्रों के मुताबिक गोयल ने प्रतिफल को नीचे लाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा की। इसके बाद बाजार ने यह अनुमान लगाना शुरू किया कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वितीयक बाजार से बॉन्ड खरीदने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) शुरू करेगा, ताकि बैंंकिंग व्यवस्था में नकदी उपलब्ध कराया जा सके। लेकिन प्रतिफल के प्रबंधन की खातिर ओएमओ का इस्तेमाल शायद ही कभी होता है। एसबीआई डीएफएचआई लिमिटेड के उपाध्यक्ष (ट्रेजरी) हेमल दोशी ने कहा, आरबीआई की तरफ से ओएमओ खरीद नकदी के प्रबंधन के लिए होती है। बड़े नोट चलन से हटाए जाने के बाद व्यवस्था में नकदी काफी ज्यादा आ गई थी, लिहाजा आरबीआई को ओएमओ खरीद दूर रहना पड़ा था, लेकिन जब चूंकि अर्थव्यवस्था आगे बढ़ती है तो नकदी की जरूरतें भी बढ़ती है। नकदी झोंकने का समय व योजना आरबीआई तय करता है, जब उसे ऐसा करना सही लगता है।
 
10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल दिन में गिरकर 7.95 फीसदी पर बंद हुआ, जो एक दिन पहले के बंद स्तर 7.99 फीसदी से कम है। शुक्रवार को थोड़े समय के लिए प्रतिफल 8.03 फीसदी को छू गया था, लेकिन खरीदारी के चलते यह जल्द ही नीचे आ गया। यह जानकारी डीलरों ने दी। मामला जब जटिल हो गया जब रुपया दबाव में आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 67.51 पर बंद हुआ, जो एक दिन पहले के मुकाबले 0.56 फीसदी कम है। आईएफए ग्लोबल के प्रबंध निदेशक अभिषेक गोयनका ने कहा, रुपये का कारोबार समकक्ष एशियाई देशों के हिसाब से हो रहा है। उन्होंने अपने आयातक क्लाइंटों को सलाह दी है कि वह 67.30-67.35 के स्तर तक हेजिंग करे। विदेशी मुद्रा भंडार 1 जून को समाप्त हफ्ते में 59.5 करोड़ डॉलर घटकर 412 अरब डॉलर रह गया। अप्रैल में यह 426 अरब डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंचा था।
 
गोयनका ने कहा, निर्यातकों को सलाह दी गई है कि वह मौजूदा स्तर पर अल्पावधि की जरूरतों को कवर करे और लंबी अवधि की फॉरवर्ड बुकिंग के लिए प्रतीक्षा करे क्योंकि मध्यम अवधि का रुख तेजी का बना हुआ है। बॉन्ड डीलरों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने शायद गुमनाम तरीके से द्वितीयक बाजार से खरीदारी की होगी, लेकिन इसकी पुष्टि करना मुश्किल है क्योंकि गिरावट के साथ आंकड़े जारी किए गए हैं। दिसंबर 2014 में बॉन्ड का प्रतिफल 8 फीसदी पर पहुंचा था। फंसे कर्ज की समस्या के चलते पूंजी का क्षरण झेल रहे राष्ट्रीयकृत बैंक अभी भी बॉन्ड बाजार नहीं आ रहे हैं। साथ ही सरकार ने इन्हें वापस बाजार में लाने की खातिर समझाने के लिए इनके साथ बैठक की है। हालांकि बैंंकों के पास अभी भी करीब 8-10 फीसदी अतिरिक्त बॉन्ड हैं और ब्याज दर के बढ़ते परिदृश्य में बॉन्ड की खरीद के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं है।
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