छोटे शेयरधारकों ने बाजार नियामक सेबी से समीक्षा करने को कहा

पवन बुरुगुला | मुंबई Jun 08, 2018 09:50 PM IST

दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही कंपनियों के लिए सूचीबद्घता समाप्त करने के नियम को नरम बनाए जाने से छोटे शेयरधारकों में चिंता पैदा हो गई है।  सूत्रों के अनुसार, कई निवेशक समर्थक संस्थाओं ने बाजार नियामक सेबी को इन मानकों की समीक्षा किए जाने के लिए पत्र लिखा है। इन संस्थाओं का कहना है कि ये नियम छोटे शेयरधारकों के हित में नहीं हैं। आईबीसी के तहत कंपनियों के लिए सूचीबद्घता समाप्त करने के विशेष मानकों को इस सप्ताह के शुरू में जारी किया गया जो अल्पांश शेयरधारकों को कच्चे सौदे की पेशकश करते हैं जिससे उन्हें कम कीमत या लगभग मुफ्त में अपने शेयर देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार, आईबीसी के तहत शामिल कंपनी को कीमत तलाश के लिए रिवर्स बुक बिल्डिंग (आरबीबी) प्रक्रिया पर अमल करने की जरूरत नहीं रह गई है और सभी शेयरधारकों को निर्धारित कीमत पर अपने शेयर देने होंगे। 
 
निवेशक संगठनों का कहना है कि नया कीमत फॉर्मूला छोटे शेयरधारकों के लिए नुकसानदायक है, क्योंकि उन्हें नए प्रबंधन के तहत सुधार की वजह से कंपनी द्वारा दर्ज की जाने वाली किसी तरह की बढ़त का लाभ उठाने का मौका नहीं मिलेगा। सेबी के साथ पंजीकृत निवेशकों की संस्था भोपाल स्टॉक इन्वेस्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने कहा, 'किसी शेयरधारक को अपनी हिस्सेदारी छोडऩे के लिए बाध्य करना अनुचित और निवेशकों के खिलाफ है। सेबी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निवेशकों के अधिकार आईबीसी (प्रक्रिया) जैसे विशेष मामलों में भी सुरक्षित हों। भले ही कंपनी दिवालिया हो गई हो, लेकिन उसे सुधार या कायाकल्प के प्रयासों से वंचित नहीं किया जा सकता।'
 
सूत्र ने कहा, 'हम नए नियमों पर पुनर्विचार के लिए सेबी को पत्र पहले ही लिख चुके हैं, क्योंकि ये नियम छोटे शेयरधारकों के लिए अच्छे नहीं हैं। इनमें से कुछ शेयरधारकों ने उस वक्त दिवालिया कंपनियों के शेयर खरीदे थे जब वे मजबूत स्थिति में थीं और वे निवेश के जरिये कंपनी के साथ जुड़े रहे। अब उन्हें सिर्फ इस आधार पर कंपनी से निकलने को नहीं कहा जाना चाहिए कि नया प्रबंधन उन्हें दूर करना चाहता है।' ज्यादातर मामलों में परिसमापन वैल्यू लेनदारों को चुकाए जाने वाले बकाया की तुलना में कुछ कम या ज्यादा है। इससे समस्या पैदा हो सकती है। कई मामलों में बोलीदाता संबद्घ शेयरधारकों को कम या कुछ नहीं चुकाकर भी उन्हें दूर कर सकता है। 
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