उषा मार्टिन ने बनाई समिति

ईशिता आयान दत्त और सुरजीत दास गुप्ता | कोलकाता/नई दिल्ली Jun 11, 2018 09:48 PM IST

उषा मार्टिन के निदेशक मंडल की आज हुई बैठक में स्टील कारोबार बेचने की संभावना तलाशने का फैसला लिया गया, जिसका मकसद कर्ज में कमी लाना है। स्टॉक एक्सचेंजों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि स्टील कारोबार बेचने की प्रक्रिया के लिए निदेशक मंडल ने स्वतंत्र निदेशकों की समिति का पुनर्गठन किया है, जो निवेश बैंकों, कंसल्टेंट व सलाहकारों की नियुक्ति करेगी, जिनसे प्रस्ताव का आकलन करने और बिक्री प्रक्रिया पर नजर डालने में मदद मिलेगी। सूत्रों ने कहा कि कंपनी के प्रबंध निदेशक राजीव झावर ने समिति में भागीदारी से खुद को दूर रखा। सूत्रों ने कहा, समिति हर कदम पर बिक्री प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सलाह देगी। मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति की जाएगी, जो स्टील कारोबार का मूल्यांकन करेंगे।

 
उषा मार्टिन ने नोटिस में कहा है, कारोबार की वास्तविक बिक्री कंपनी करेगी जब बोर्ड, नियामकों, शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी मिल जाएगी। उषा मार्टिन के ऊपर करीब 50 अरब रुपये कर्ज है। समझा जाता है कि टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील ने इसके स्टील कारोबार में रुचि दिखाई है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि अभी तक कोई औपचारिक पेशकश नहीं मिली है। शुक्रवार को टाटा स्टील ने मीडिया रिपोर्ट के जवाब में स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्ट किया था कि कंपनी ने उषा मार्टिन के स्टील कारोबार के अधिग्रहण के लिए कोई बोली जमा नहीं कराई है। फर्म ने कहा था, समय-समय पर कंपनी कारोबार से जुड़े विभिन्न रणनीतिक मामलों पर चर्चा करती है, जिनमें संभावित अधिग्रहण के लिए ड्यू डिलिजेंस यानी जांच परख शामिल है। ऐसी कई चर्चा चल रही है और हमारी नीति ऐसी चर्चा से जुड़े कयासों पर टिप्पणी करने की नहीं है। आज की बोर्ड बैठक में प्रशांत झावर और उनके पिता बसंत कुमार झावर ने किसी एक कारोबार को बेचने के बजाय पूरी कंपनी को बेचना बेहतर होगा। हालांकि वायर रोप्स कारोबार के लिए किसी तरह की पेशकश नहीं है।
 
उषा मार्टिन में प्रवर्तकों को दो धड़े हैं : वृज झावर और उनके बेटे राजीव झावर (मौजूदा प्रबंध निदेशक) एक तरफ हैं जबकि दूसरी ओर मानद चेयरमैन बसंत कुमार झावर और उनके बेटे प्रशांत झावर हैं। उषा मार्टिन में दोनों धड़े की समान हिस्सेदारी 25.5-25.5 फीसदी है। पहले उषा मार्टिन अपने वायर व वायर रोप्स कारोबार को बेचने पर सक्रियता से विचार कर रही थी, लेकिन स्टील क्षेत्र की परिस्थितियां सुधरने के चलते कंपनी स्टील कारोबार बेचने के लिए प्रोत्साहित हुई। स्टील क्षेत्र का परिदृश्य काफी ज्यादा सुधरा है। वित्त वर्ष 2018 मेंं देसी स्टील उपभोग 7.9 फीसदी रहा, जो वित्त वर्ष 2018 के पहले नौ महीने में 5.2 फीसदी रहा था। इसके परिणामस्वरूप देसी स्टील कीमतों में दिसंबर के आखिर से तेज बढ़ोतरी हुई थी। स्टील कारोबार का हालांकि उषा मार्टिन का राजस्व में अहम योगदान है, लेकिन वायर रोप्स कारोबार ज्यादा लाभकारी है। स्टील कारोबार से राजस्व करीब 34.21 अरब रुपये रहा जबकि कर पूर्व लाभ 0.99 अरब रुपये। वायर व वायर रोप्स कारोबार का राजस्व 15.17 अरब रुपये व लाभ 2.09 अरब रुपये रहा।
कीवर्ड usha martin, tata steel, JSW,

  
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