तीसरे नंबर पर जियो, पुरानी का भी बढ़ेगा राजस्व

किरण राठी | नई दिल्ली Jun 11, 2018 09:48 PM IST

राजस्व बाजार हिस्सेदारी (आरएमएस) के लिहाज से रिलायंस जियो देश की तीसरी सबसे बड़ी मोबाइल ऑपरेटर बन गई है, लेकिन इसकी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद पुरानी दूरसंचार कंपनियां भी अपना राजस्व बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में कामयाब रही हैं। ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018 की मार्च तिमाही में भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया की बाजार हिस्सेदारी बढ़ी है और ये कंपनियां सहज रूप से जियो से आगे बनी हुई हैं। छोटे ऑपरेटरों ने जो बाजार हिस्सेदारी गंवाई, उससे जियो को फायदा मिला।
 
कड़ी प्रतिस्पर्धा और कम टैरिफ के चलते दूरसंचार उद्योग के राजस्व में गिरावट जारी है। यूबीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, दूरसंचार उद्योग के समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है और जनवरी में कीमतों में कटौती, इंटरनैशनल टर्मिनेशन शुल्क में कमी और बड़ी कंपनियों के राजस्व में एकीकरण के चलते तिमाही दर तिमाही के हिसाब से एजीआर 7.3 फीसदी घटा। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि एयरटेल की राजस्व बाजार हिस्सेदारी (आरएमएस) मार्च 2018 की तिमाही में बढ़कर 32.2 फीसदी पर पहुंच गई, जो दिसंबर 2017 की तिमाही में 31.2 फीसदी थी। इसी तरह वोडाफोन आइडिया संयुक्त की हिस्सेदारी 37.3 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 38 फीसदी पर पहुंच गई। रिलायंस जियो की हिस्सेदारी 15.6 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 20.1 फीसदी पर पहुंच गई। उम्मीद के मुताबिक नुकसान उठाने वाली थी छोटी कंपनियां, जो या तो दूरसंचार क्षेत्र से निकल गई या बड़ी कंपनियों में उनका विलय हो गया। तीन अन्य छोटी दूरसंचार कंपनियों का आरएमएस मार्च तिमाही में घटकर 9.7 फीसदी रह गया, जो दिसंबर 2017 की तिमाही में 15.9 फीसदी रहा था।
 
गोल्डमैन सैक्स ने कहा, पिछले कुछ महीनों से टैरिफ मोटे तौर पर स्थिर है, ऐसे में हमें पुरानी दूरसंचार कंपनियों का राजस्व वित्त वर्ष 2019 की पहली तिमाही में स्थिर हो जाएगा। एयरटेल के शेयर की खरीद की अपनी सलाह को हम दोहराते हैं क्योंकि हमारा मानना है कि जब भी टैरिफ का माहौल सुधरना शुरू होगा, कंपनी के पास बाजार हिस्सेदारी के मामले में लोहा लेने और लाभ अर्जित करने की क्षमता है। विश्लेषकों के मुताबिक, सितंबर 2016 में रिलायंस जियो की सेवा शुरू होने के बाद से दूरसंचार उद्योग का राजस्व 7 अरब डॉलर सालाना घटा है। हालांकि ज्यादातर छोटी कंपनियां अब बाजार से निकल गई हैं, उद्योग का राजस्व निचले स्तर से बाहर निकल सकता है। यूबीएस ने कहा कि टेलीनॉर समेत एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, रिलायंस जियो और बीएसएनएल/एमटीएनएल के पास उद्योग के मोबाइल एजीआर का 98.2 फीसदी है जबकि ग्राहक बाजार हिस्सेदारी 91.1 फीसदी। यह बताता है कि बाकी 9 फीसदी सिम कार्ड रद्द हो सकते हैं या बंद हो गए हैं या राजस्व अर्जित नहीं कर रहे हैं। 
कीवर्ड reliance jio, mukesh ambani,

  
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