एनसीएलटी पहुंची स्टर्लिंग बायोटेक

अद्वैत राव पलेपू | मुंबई Jun 11, 2018 09:49 PM IST

दवा कंपनी स्टर्लिंग बायोटेक को कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया के तहत दिवालिया कार्यवाही के लिए नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में स्वीकार किया गया है। गुजरात की इस कंपनी के ऊपर बैंकों का 40 अरब रुपये से ज्यादा बकाया है, वहीं इसकी मूल कंपनी स्टर्लिंग समूह के ऊपर विभिन्न बैंकों का 50 अरब रुपये से ज्यादा बकाया है, जिसका हित अन्य कारोबार में भी है। वकील श्याम कपाडिय़ा ने आन्ध्रा बैंक की तरफ से एनसीएलटी से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के ऊपर कर्ज बढ़ता गया और प्रवर्तक देश छोड़कर भाग गए। दिसंबर 2016 में कंपनी ने 54 अरब रुपये के कर्ज भुगतान में डिफॉल्ट किया।
 
अक्टूबर 2017 में प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी व इसके प्रवर्तकों नितिन व चेतन संदेसरा के खिलाफ कथित धनशोदन के मामले की जांच शुरू की। आरोप है कि संदेसरा ब्रदर्स की कई कंपनियों ने विभिन्न बैंकों से 53.83 अरब रुपये की उधारी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की। ये कर्ज हालांकि धीरे-धीरे एनपीए बन गए और आन्ध्रा बैंक की अगुआई वाले कंसोर्टियम ने ये कर्ज दिए थे और कंसोर्टियम में यूको बैंक, एसबीआआई, इलाहाबाद बैंक और बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं।अब कंपनी को आईबीसी के तहत एनसीएलटी ले जाया गया है और ये लेनदार अंतरिम समाधान पेशेवर के पास अपने-अपने दावे रखेंगे। बैंकों ने अभी तक स्टर्लिंग समूह, स्टर्लिंग पोर्ट लिमिटेड, पीएमटी मशीन्स लिमिटेड, स्टर्लिंग एसईजेड ऐंड इन्फ्रा लिमिटेड और स्टर्लिंग ऑयल रिसोर्सेस लिमिटेड के खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित किया है। जनवरी 2018 में प्रवर्तन निदेशालय ने आन्ध्रा बैंक के पूर्व निदेशक अनूप प्रकाश गर्ग को गिरफ्तार किया, जो सीबीआई की तरफ से एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद हुआ। 
कीवर्ड pharma, medicine, NCLT,

  
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