केएसएस पेट्रॉन की एकमात्र बोलीदाता आरपीएमजी

अद्वैत राव पालेपू | मुंबई Jun 12, 2018 09:35 PM IST

आरपीएमजी इन्वेस्टमेंट्स एलएलपी कॉरपोरेट कर्जदार कैजस्ट्रॉयसर्विस (केएसएस) पेट्रॉन के लिए एकमात्र बोलीदाता के तौर पर उभरी है। कंपनी ने 10 जून की आखिरी समय-सीमा से पहले ईओआई के साथ केएसएस पेट्रॉन के लिए रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) मुहैया करा दिया था, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ईओआई से संबंधित शुल्क उस समय तक प्राप्त नहीं हुआ था जिससे उसकी पात्रता पर सवाल उठ सकता है। कजाकस्तान स्थित केएसएस की सहायक इकाई केएसएस पेट्रॉन को इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्ट्सी कोड (आईबीसी) के तहत 1 अगस्त 2017 को कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजोल्यूशन प्रोसेस (सीआईआरपी) के लिए स्वीकार किया गया था।
 
मंगलवार को, कंपनी के वित्तीय लेनदारों में से एक ने मुंबई में एनसीएलटी के समक्ष आवेदन पेश कर इस समाधान योजना का विरोध जताया। आईबीसी के नियमों के अनुसार आरपीएमजी इन्वेस्टमेंट्ïस ने केएसएस पेट्रॉन के लिए 5 जून को समाधान योजना सौंपी थी।  केएसएस पेट्रॉन इंडिया पूर्व में आर्सेलरमित्तल के प्रवर्तक एल एन मित्तल के स्वामित्व वाली कंपनी है। आर्सेलरमित्तल इस्पात दिग्गज एस्सार स्टील की खरीदारी की दौड़ में हैं। एस्सार स्टील को आईबीसी के तहत स्वीकार किया गया है।
 
पिछले कुछ महीनों के दौरान आर्सेलरमित्तल और न्यूमेटल दबाव से जूझ रही इस्पात कंपनी के लिए बोलियां लगाने की एक-दूसरे की पात्रता पर सवाल उठाती रही हैं।  आईबीसी की धारा 29ए के अनुसार मौजूदा दबावग्रस्त कॉरपोरेट खाते के प्रवर्तक के संबंधी, कंपनी से जुड़े व्यक्ति या संबंधित पक्षों को आईबीसी के तहत बोली प्रक्रिया में भाग लेने से रोका गया है। न्यूमेटल के मामले में, एस्सार स्टील के पूर्व प्रवर्तक रुइया परिवार के सदस्य रेवंत रुइया उस ट्रस्ट के लाभार्थी की सूची में शामिल थे जिसकी न्यूमेटल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके बाद न्यूमेटल ने रेवंत रुइया को ट्रस्ट से हटा दिया था। जहां आर्सेलरमित्तल और उसके प्रवर्तक एल एन मित्तल के मामले में, उत्तम गैल्वा स्टील्स (आईबीसी प्रक्रिया से जूझ रही कंपनी) में आर्सेलरमित्तल की 29 प्रतिशत भागीदारी है।
कीवर्ड RPMG, KSS,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक