नए स्टॉक एक्सचेंजों के लिए आसान होंगे नियम

श्रीमी चौधरी | मुंबई Jun 14, 2018 09:49 PM IST

बदलेगा नियम

एमआईआई में शेयरधारिता की सीमा होगी खत्म
सेबी की 21 जून की बोर्ड बैठक में हो सकता है फैसला
शेयर पुनर्खरीद और अधिग्रहण के नियमों में हो सकता है बदलाव
एमआईआई के नियमों की समीक्षा के लिए गठित की गई थी समितियां
सिफारिशों के आधार पर ही सेबी ला रहा है बदलाव का प्रस्ताव
दो मौजूदा नियमों में होंगे बदलाव

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) नए स्टॉक एक्सचेंज और डिपॉजिटरीज शुरू करने के लिए नियमों को आसान बनाने पर विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक बाजार नियामक नए स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजटरीज जैसे मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंटरमीडिएटरीज (एमआईआई) में शेयरधारिता की सीमा को खत्म करने का प्रस्ताव ला सकता है।  अभी दूसरे स्टॉक एक्सचेंजों, डिपॉजिटरीज और बैंकों आदि को अपनी शेयर पूंजी का 15 फीसदी तक हिस्सा निवेश के रूप में स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरीज में रखने की अनुमति है। दूसरे निवेशक केवल 5 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रख सकते हैं।

सेबी अब दो नियमों के तहत स्वामित्व के प्रावधानों में ढील देने की संभावना तलाश रहा है। नए प्रावधानों से शेयरधारिता की सीमा बढ़ जाएगी और एमआईआई की स्थापना के लिए नए तरह के निवेशक भी मिल जाएंगे। बाजार नियामक इस बारे में 21 जून को होने अपनी बोर्ड बैठक में फैसला ले सकता है। साथ ही इस बारे में लोगों से भी सुझाव मांगे जा सकते हैं।

सेबी ने महसूस किया है कि बाजार के हर कामकाज में आगे बढऩे के लिए एकाधिकार की प्रवृत्ति बढ़ रही है, इसलिए एमआईआई के बीच स्वस्थ प्रतिस्पद्र्घा को बढ़ावा देने की जरूरत है। सेबी द्वारा वित्त मंत्रालय को भेजे गए एक नोट में कहा गया है कि नए एमआईआई स्थापित करने के मौजूदा नियम हतोत्साहित करने वाले हो सकते हैं और उनमें बदलाव की जरूरत है। नोट में कहा गया है कि एमआईआई से संबंधित नियामकीय ढांचे में समय के मुताबिक बदलाव किया जाना चाहिए ताकि नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके।

एमआईआई नियमों की समीक्षा के लिए सेबी ने कई समितियों का गठन किया था और उनकी सिफारिशों के आधार पर ही अब मौजूदा ढांचे में बदलाव की तैयारी की जा रही है। इन समितियों ने सुझाव दिया था कि एमआईआई के कामकाज को सुगम बनाने के लिए उनके स्वामित्व के ढांचे का विस्तार होना चाहिए। शर्तें पूरी करने वाली कुछ अन्य संस्थाओं को एमआईआई में अधिक शेयरधारिता की अनुमति दी जा सकती है और फिर एक तय समयावधि के बाद इसमें कमी की जा सकती है।

समितियों का यह भी कहना था कि नए प्रतिभागियों के उभरने से वित्तीय बाजार कई तरह से प्रभावित हुआ है। इसमें प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल, फंड जुटाने के लिए वित्तीय बाजार प्लेटफॉर्म और निवेश उत्पादों तक ऑनलाइन पहुंच शामिल है। इससे मौजूदा निवेशकों को भी फायदा मिला है और उन्हें बेहतर विकल्प मिला है। साथ ही उत्पादों की पहुंच बढऩे से नए निवेशकों की भागीदारी को भी प्रोत्साहन मिला है।

खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सिद्घार्थ शाह ने कहा, 'घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की शेयरधारिता पर सीमा ने गंभीर निवेशकों को इस क्षेत्र में आने से रोकने का काम किया है। इस सीमा को खत्म करने से इस बारे में निवेशकों के बीच वैश्विक बाजार की तरह मुक्त बाजार की धारणा बनेगी।' उन्होंने कहा कि इस  कदम से निवेशकों को ज्यादा अधिकार मिलेंगे और प्रतिस्पद्र्घा बढ़ेगी।  सूचीबद्घ कंपिनयों के शेयर पुनर्खरीद और अधिग्रहण के नियमों में संशोधन की योजना भी बोर्ड बैठक के एजेंडे में शामिल है।

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