मित्तल की पेशकश पर लेनदार लेंगे एनसीएलएटी से निर्देश

देव चटर्जी | मुंबई May 16, 2018 09:49 PM IST

एस्सार स्टील के लेनदार गुरुवार को नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल से संपर्क कर आर्सेलरमित्तल की तरफ से की गई 70 अरब रुपये की पेशकश पर निर्देश मांगेंगे। वे एनसीएलएटी से यह अनुमति भी चाहेंगे कि क्या दूसरे दौर की बोली खोली जाए, जिसमें वेदांत व जेएसडब्ल्यू स्टील ने भी भागीदारी की थी।एनसीएलएटी का दरवाजा एस्सार के बोलीदाताओं न्यूमेटल व आर्सेलरमित्तल ने खटखटाया था, जो नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के अहमदाबाद पीठ के उस आकलन के खिलाफ था जो उसने इस साल फरवरी में हुई उनकी पहले दौर की बोली पर दिया था।
 
लेनदारों ने कहा कि वे गुरुवार को ट्रिब्यूनल से स्पष्टता चाहेंगे कि आर्सेलरमित्तल की पेशकश पर कैसे आगे बढ़ा जाए, जो कई शर्तों के साथ है। फरवरी में आर्सेलरमित्तल और इसके चेयरमैन एलएन मित्तल ने खुद को क्रमश: उत्तम गैल्वा स्टील लिमिटेड व केएसएस पेट्रोन के प्रवर्तक से अवर्गीकृत कर लिया था ताकि एस्सार की बोली के पात्र बन सके। मौजूदा आईबीसी संहिता के तहत डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के प्रवर्तक दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए बोली लगाने के लिए सबसे पहले बकाया भुगतान करें। वकीलों ने कहा, यह भुगतान शर्तों के साथ नहीं किया जा सकता।
 
कॉरपोरेट वकील ने कहा, बैंक शर्तिया पेशकश स्वीकार नहीं करेंगे और मामला अदालत में चला जाएगा। धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के आलोक धीर ने कहा, शर्त के साथ पेशकश उन्हें अयोग्यता से नहीं बचाता है क्योंकि उन्हें लेनदारों की समिति के पास अपनी योजना देने से पहले बकाया भुगतान करना होगा। दूसरा, उन्होंने उत्तम गैल्वा की हिस्सेदारी का हस्तांतरण कर दिया है, ऐसे में उन्हें इक्विटी या प्रबंधन हिस्सेदारी दोबारा पाने के लिए उत्तम गैल्वा व इसके प्रवर्तकों के साथ एक ढांचे पर काम करना होगा और बकाया भुगतान करना होगा, जो लंबी प्रक्रिया है क्योंंकि यह सूचीबद्ध कंपनी है। शेयरधारकों की सहमति, सेबी की अधिग्रहण संहिता आदि उत्तम गैल्वा के लेनदारों के भुगतान की खातिर प्रासंगिक शर्तों का दृष्टांत हो सकता है।
 
धीर ने कहा, पहली बोली रद्द करने का फैसला और दूसरे दौर की बोली का आकलन करना लेनदारों के लिए बेहतर होगा ताकि दिवालिया संहिता का मकसद पूरा हो सके, जो हितधारकों के लिए अधिकतम कीमत पाने से जुड़ी है। भूषण पावर व बिनानी सीमेंट जैसे मामलों में यह दृष्टांत है, जहां एनसीएलटी ने ज्यादा बोली की अनुमति दी ताकि बैंकों को ज्यादा से ज्यादा रकम मिल सके। बुधवार को आर्सेलरमित्तल ने एस्सार स्टील की बोली लगाने के पात्र बनने के लिए डिफॉल्ट करने वाली कंपनी से संबंधित 70 अरब रुपये का बकाया भारतीय स्टेट बैंक के एस्क्रो खाते में हस्तांतरित कर दिया। आर्सेलरमित्तल और इसकी प्रतिस्पर्धी न्यूमेटल की पहले दौर की बोली रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की तरफ से अयोग्य पाए जाने के बाद यह किया गया। आर्सेलरमित्तल को इस आधार पर अयोग्य करार दिया गया था कि इसके पास उत्तम गैल्वा की 29 फीसदी हिस्सेदारी है, जो डिफॉल्ट करने वाली कंपनी पर सीधा नियंत्रण है, वहीं इसके प्रवर्तक लक्ष्मी मित्तल के पास केएसएस कजाकिस्तान की 33 फीसदी हिस्सेदारी थी और इस तरह से भारत में बैंंक डिफॉल्टर केएसएस पेट्रोन की 100 फीसदी हिस्सेदारी भी है।
 
दूसरी ओर, न्यूमेटल को इस आधार पर अयोग्य करार दिया गया कि एस्सार के प्रवर्तक के बेटे रेवंत रुइया उस ट्रस्ट के लाभार्थीं हैं जहां न्यूमेटल की 25 फीसदी हिस्सेदारी है। लेकिन दोनों कंपनियां एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ चली गई, जिसने पहले दौर की बोली रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल व सीओसी के पास दोबारा विचार के लिए भेज दी और खास तौर से आर्सेलरमित्तल की अयोग्यता के उपचार के तौर पर बकाया भुगतान की ओर इंगित किया। आर्सेलरमित्तल ने एनसीएलटी के आकलन के खिलाफ अपील की। न्यूमेटल ने भी अपील की, यह कहते हुए कि यह उपचार कंपनी पर लागू नहीं होता है। एनसीएलएटी इस मामले पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। चूंकि दोनों पक्षकार नकदी संपन्न हैं, लिहाजा मामले पर अंतत: सर्वोच्च न्यायालय फैसला करेगा।
कीवर्ड essar, steel, NCLT,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक