दिवालिया मामलों के भार से विलय के मामले दबे

श्रीमी चौधरी | मुंबई May 16, 2018 09:49 PM IST

दिवालिया व धनशोधन संहिता से जुड़े मामलों को तरजीह दिए जाने से विलय व अधिग्रहण के मामले नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के पास जमा होने शुरू हो गए हैं। उद्योग के जानकारों का कहना है कि विलय की मंजूरी के लिए आवेदन करने वाली कई कंपनियां खास तौर से छोटी व मझोली कंपनियां चुनौतियों का सामना कर रही हैं क्योंकि पीठ में पहले से ही आईबीसी के मामलों की भरमार हो गई है। इनमें से कुछ कंपनियों ने बाजार नियामक सेबी व कंपनी मामलों के मंत्रालय से संपर्क कर हस्तक्षेप करने की मांग की है।
 
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 जनवरी 2018 को विलय व एकीकरण के 1,630 मामले ट्रिब्यूनल के पास लंबित थे। मार्च में कंपनी मामलों के राज्य मंत्री पी पी चौधरी ने राज्यसभा को बताया था, कुल 9073 मामले एनसीएलटी के पास हैं, जिनमें 1630 मामले एकीकरण के, 2511 मामले दिवालिया के और 4932 मामले कंपनी अधिनियम की अन्य धाराओं से जुड़े हैं।  चौधरी ने कहा था, कंपनी अधिनियम व आईबीसी में तय समयसीमा के तहत मामले के निपटान के लिए हर तरह की कोशिश ही रही है। हालांकि वास्तविकता अलग दिख रही है क्योंकि उद्योग की कंपनियों का कहना है कि लंबित मामलों की संख्या जनवरी से बढ़ी है।
 
एक लॉ फर्म ने कहा, एनसीएलटी को विलय की मंजूरी देने का काम सौंंपने का मकसद प्रक्रिया मेंं तेजी लाना था। कोरम के अभाव में कंपनी की कारोबारी योजना फंसी हुई है क्योंकि उन्हें समय पर मंजूरी नहीं मिल रही है। पहले कंपनियों को विलय आदि की योजना के लिए उच्च न्यायालय से संपर्क करना होता था। अब ऐसी योजनाओं को मंजूरी देने के लिए एनसीएलटी न्यायिक निकाय है। यह कदम मंजूरी में तेजी लाने के लिए उठाया गया था। हालांकि सूत्रों ने कहा कि ट्रिब्यूनल की तरफ से लिया जा रहा समय उच्च न्यायालयों के मुकाबले ज्यादा है।
 
एक बैंंकर ने कहा, आईबीसी के मामलों को तरजीह दी जा रही है क्योंकि सरकार का ध्यान फंसे कर्ज की समस्या से बैंकिंग क्षेत्र को निकालने पर है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में निर्देश दिया है कि 20 अरब रुपये से ज्यादा कर्ज वाले मामले एनसीएलटी 15 दिन के भीतर अपने हाथ में लेगा, अगर समाधान योजना नाकाम हो जाती हो। ऐसे में संभावना यह हो सकती है कि ट्रिब्यूनल दिवालिया मामलों को अन्य मामलों पर तरजीह दे रहा है। कानूनी विशेषज्ञों ने कहा, सरकार को एक ऐसी अग्रिम व्यवस्था बनानी चाहिए जो सुनिश्चित करे कि ट्रिब्यूनल विभिन्न कानूनों के चलते काम बंद न कर दे। अभी एनसीएलटी के 11 पीठ और सिर्फ एक नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल है। एनसीएलटी के कुल 22 सदस्य हैं, जिसमें 16 न्यायिक सदस्य हैं जबकि छह तकनीकी सदस्य।
कीवर्ड NCLT, नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी),

  
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