भूषण पावर ऐंड स्टील के संघर्ष में टाटा को मिल सकती है बढ़त

ईशिता आयान दत्त | कोलकाता Jun 12, 2018 09:34 PM IST

भूषण पावर ऐंड स्टील की लेनदारों की समिति के सामने सोमवार को सभी बोलीदाताओं ने समाधान योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद जानकारी मिली है कि इस मामले में टाटा स्टील को बढ़त हासिल हो सकती है। तीनों बोलीदाता टाटा स्टील, लिबर्टी हाउस और जेएसडब्ल्यू स्टील ने अपनी-अपनी समाधान योजना के बारे में लेनदारों की समिति को विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद जब सभी लेनदारों ने अनौपचारिक मुलाकात की तो सूत्रों ने संकेत दिया कि इसमें टाटा स्टील की समाधान योजना को बढ़त मिल सकती है क्योंकि लिबर्टी हाउस की फंडिंग की योजना को लेकर कुछ चिंता थी।

 
बताया जाता है कि टाटा स्टील ने 24,500 करोड़ रुपये की बोली लगाई है जिसमें 7500 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश शामिल है। लिबर्टी हाउस की बोली टाटा स्टील की 18,000 करोड़ रुपये की बोली से 1,000 करोड़ रुपये ज्यादा है। हालांकि फंडिंग के स्रोत को लेकर कुछ सवाल थे, लेकिन सूत्रों ने कहा कि सीओसी इन मसलों के समाधान के लिए कंपनी को वक्त दे सकती है। लिबर्टी हाउस के प्रवक्ता ने कहा, अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। सीओसी अभी आकलन कर रही है और उन सवालों पर भी नजर डाल रही है जिनका समाधान दोनों पक्षों को करना है। साथ ही कोई भी नहींं जानता कि कौन विजेता होगी क्योंकि सीओसी अपना फैसला सील कर देगी और एनसीएलएटी में 12 जुलाई की सुनवाई की प्रतीक्षा करेगी।
 
सीओसी की अगली बैठक 19 जून को होगी। सभी बोलीदाताओं की योग्यता दिवालिया संहिता की धारा 29 ए के तहत जांची जाएगी, जो आईबीसी के मामलों के लिए जरूरी है। टाटा स्टील पहले ही आक्रामक बोली के जरिए भूषण स्टील को हासिल कर चुकी है। यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी की भूषण पावर ऐंड स्टील में दिलचस्पी है, टाटा स्टील के एक आला अधिकारी ने कहा, हम सही वक्त पर फैसला लेंगे। अगर टाटा स्टील को भूषण पावर ऐंड स्टील भी मिल जाती है तो वह देसी बाजार में सबसे बड़ी स्टील निर्माता बन जाएगी। भूषण पावर ऐंड स्टील की क्षमता 30 लाख टन की है और इसके ऊपर 470 अरब रुपये का कर्ज है।
 
एनसीएलएटी ने सीओसी को बोली के चयन के मामले में आगे बढऩे और अपने फैसले को सील कवर में रखने को कहा था। यह एनसीएलएटी के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। एनसीएलएटी में अगली सुनवाई 12 जुलाई को होनी है। भूषण पावर ऐंड स्टील शुरू में दोतरफा दौड़ थी। टाटा स्टील और जेएसडब्ल्यू स्टील ने समयसीमा के भीतर बोली जमा कराई थी। हालांकि लिबर्टी हाउस ने देर से बोली लगाई। सीओसी ने इस आधार पर बोली ठुकरा दी थी कि इसने देर से बोली जमा कराई, लेकिन एनसीएलटी ने सीओसी को इस पर विचार करने को कहा। टाटा स्टील ने एनसीएलटी के आदेश को एनसीएलएटी में चुनौती दी थी, लेकिन कार्यवाही पर इसे स्टे नहीं मिला।
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