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सुधारों पर सतर्कता

संपादकीय |  May 14, 2018 10:20 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) निरंतर यह प्रयास कर रहा है कि कारोबारी अनुभव में सुधार लाया जाए और कंपनियों के लिए प्राथमिक बाजार में प्रवेश आसान किया जाए। उदाहरण के लिए बाजार नियामक ने इक्विटी डेरिवेटिव के लिए कारोबारी घंटे बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। आगामी 1 अक्टूबर से यह कारोबार सुबह 9 बजे से रात 11.55 बजे तक हो सकेगा। इसके साथ ही इक्विटी डेरिवेटिव की कारोबारी अवधि अधिकांश जिंसों के अनुरूप हो जाएगी। इस बार यह विस्तार निवेशकों को यह क्षमता प्रदान करता है कि वे अन्य क्षेत्रों से आने वाले मूल्य के लिहाज से संवेदनशील खबरों पर जल्दी प्रतिक्रिया दे सकें। यानी अब भारतीय एक्सचेंज भी दुबई और सिंगापुर के एक्सचेंज के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। ये दोनों एक्सचेंज अपनी विस्तारित कार्यावधि में भारत से संबंधित सौदों की पेशकश करते हैं। सेबी रिजर्व बैंक के साथ मिलकर मुद्रा डेरिवेटिव का कारोबार भी बढ़े हुए घंटों तक करने पर चर्चा कर रहा है। बहरहाल अभी तक यह स्पष्टï नहीं है कि बढ़ी हुई अवधि के दौरान किस तरह के सौदों को मंजूरी दी जाएगी। क्या बढ़ी हुई अवधि के दौरान होने वाला कारोबार केवल सूचकांक आधारित सौदों तक सीमित रहेगा या फिर इसमें सूचकांकों और एकल शेयर का वायदा और विकल्प की उपलब्धता भी होगी? चाहे जो भी हो एक बार कारोबारी घंटे बढ़ जाने के बाद ब्रोकरेज और एक्सचेंजों को निगरानी व्यवस्था मजबूत करनी होगी और अनुपालन प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करना होगा।

 
नियामक की प्राथमिक बाजार सलाहकार समिति (पीएमएसी) की ओर से जारी मशविरा पत्र में पूंजी जुटाने के मानकों और प्रक्रियाओं को लेकर स्वागतयोग्य बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है। एक प्रस्ताव यह भी है कि कंपनियों को 10 करोड़ रुपये तक के राइट इश्यू जारी करने का अधिकार होना चाहिए वह भी बिना कोई मसौदा विवरण जारी किए।  फिलहाल ऐसी रियायत केवल 50 लाख रुपये मूल्य तक के राइट इश्यू पर ही है। माना जा रहा है कि इस बढ़ी हुई सीमा की बदौलत कंपनियां बिना अधिक कागजी कार्रवाई के ज्यादा राशि जुटा सकेंगी। नियामक ने यह सुझाव भी दिया है कि एंकर निवेशकों के लिए छोटे और मझोले उद्यमों की प्रारंभिक पेशकश की सीमा को 100 करोड़ रुपये से घटाकर दो करोड़ रुपये कर दिया जाए। इससे एंकर निवेशकों का तनाव कम होगा और एसएमई के लिए फंड जुटाना आसान होगा। पीएमएसी ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि प्रारंभिक पेशकश को दो कार्य दिवस के भीतर मूल्य बैंड की घोषणा कर देनी चाहिए। फिलहाल इसके लिए पांच दिन का वक्त है। बहरहाल, प्रारंभिक पेशकश और उसके बाद फॉलोऑन दोनों को वास्तविक इश्यू अवधि को पांच कार्यदिवस तक विस्तारित करने की इजाजत होगी। फिलहाल इसके लिए तीन दिन की अवधि है। 
 
व्यय की सीमा में इजाफा और इश्यू अवधि में विस्तार दोनों ही सकारात्मक कदम हैं। इसके बावजूद नियामक को प्रारंभिक पेशकश के वक्त समूह की कंपनियों के बारे में अनिवार्य खुलासे को सहज बनाने के सुझाव पर कदम उठाते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। पीएमएसी ने प्रस्ताव रखा है कि केवल संबंधित पक्ष के लेनदेन के बारे में सूचना जारी की जानी चाहिए। फिलहाल इस खुलासे में समूह की तमाम कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों के अलावा उनके कानूनी विवादों की पूरी जानकारी भी शामिल रहती है। अगर ऐसी जानकारी अब सामने नहीं आती है तो पारदर्शिता का बहुत अधिक नुकसान होगा। इतना ही नहीं नियामक को कारोबारी व्यवस्था के चुनिंदा पहलुओं की भी समीक्षा करनी चाहिए। उदाहरण के लिए कारोबारी घंटों में इजाफा होने के बाद डेटा को विदेशी एक्सचेंज के साथ साझा न करने के पक्ष में कोई खास दलील नहीं रह जाएगी। पहले यह कदम शायद इसलिए उठाया गया था ताकि कारोबार भारत से बाहर न जाए।
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