संपन्न कर्नाटक में दलों के लिए सत्ता के क्या हैं मायने?

कृष्णकांत/ अर्चिस मोहन और अभिषेक वाघमारे |  May 16, 2018 09:58 PM IST

कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर)ने मंगलवार को चुनाव नतीजे आने के बाद एक साथ आने में थोड़ी देर जरूर की लेकिन आखिरकार चुनावी कड़वाहट भुलाकर राज्य में गठबंधन सरकार बनाने की घोषणा कर ही डाली। जहां एक ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे ज्यादा सीटों वाली पार्टी होने के नाते राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश कर रही है वहीं दूसरी तरफ कर्नाटक में अपनी सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और जद (एस) दोनों जी-जान लगाकर जुटी हैं। औद्योगिक रूप से विकसित समृद्घ कर्नाटक के लिए देश के प्रमुख राजनीतिक दलों का महत्त्वाकांक्षी होना लाजिमी है। यहां का खनन उद्योग, सेवा क्षेत्र अहम होने के साथ ही राज्य की राजधानी बेंगलूरु, देश में प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप उद्योग का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। आर्थिक और राजनीतिक पैमाने पर देश के सर्वाधिक प्रभावी राज्यों में शुमार होने की वजह से कर्नाटक में सत्ता पाने के लिए दलों के बीच में होड़ लगना हैरान नहीं करता।

 
कर्नाटक के अलावा समृद्घ राज्यों में केवल पंजाब ही है जहां कांग्रेस सरकार चला रही है। जद (एस) एक ऐसी क्षेत्रीय पार्टी है जिसका जनाधार केवल कर्नाटक तक ही सिमटा है। वह एक दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर है। जद (एस) के अध्यक्ष एच डी देवेगौड़ा ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए गए हाल के साक्षात्कार में कहा था कि उनकी पार्टी के पास पूंजी का अभाव है। अगर जद (एस) और कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में जबरदस्त मुकाबला देना चाहते हैं तो राज्य में गठबंधन सरकार बनाना इन दोनों दलों के हित में होगा। 
 
आर्थिक पैमाने पर देखें तो सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के मामले में कर्नाटक दक्षिण भारत में तमिलनाडु के बाद दूसरी सबसे बड़ी और देश में महाराष्टï्र, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के बाद चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2017-18 में राज्य ने 12.7 लाख करोड़ रुपये का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दर्ज कराया। यह पिछले वर्ष मौजूदा मूल्य पर भारत की जीडीपी का 7.6 प्रतिशत था जबकि देश की कुल जनसंख्या में राज्य की हिस्सेदारी 4.5 प्रतिशत है। राज्य की राजधानी बेंगलूरु, प्रौद्योगिकी उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमिता का प्रमुख केंद्र है। पिछले तीन दशकों में बेंगलूरु क्षेत्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र बन चुका है जिसकी कुल जनसंख्या लगभग 1.2 करोड़ है। बड़ी जनसंख्या और दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों और स्टार्टअप की मौजूदगी बेंगलूरु को वैश्विक स्तर के मेगासिटी में शुमार करता है। 
 
कांग्रेस द्वारा राज्य में सरकार बनाने में असफल रहने पर एक राजनीतिक दल के तौर पर उसके संगठन और मनोबल दोनों को चोट पहुंचेगी। भाजपा के लिए कर्नाटक, दक्षिण भारत में उसके विस्तार का द्वार खोलेगी। देश के बड़े राज्यों में कर्नाटक के पास बेहतर सार्वजनिक पूंजी है। 2016-17 में राज्य को 256.6 अरब रुपये का सकल राजकोषीय घाटा हुआ जो कि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का महज 2.3 प्रतिशत है। यहां ब्याज और पेंशन का बोझ न्यूनतम है जो कि 2016-17 में राज्य जीडीपी का 1.1 प्रतिशत के बराबर था। इसके चलते राज्य सरकार के पास सार्वजनिक निवेश करने के लिए काफी बजट होता है।    
 
कर्नाटक देश में सेवा क्षेत्र में भी अग्रणी राज्य है। राज्य के राजस्व में सेवा क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है। पिछले तीन सालों के दौरान औद्योगिक निवेश के मामले में सभी राज्यों के मुकाबले कर्नाटक में सर्वाधिक रुचि देखी गई। बड़ी कंपनियों ने राज्य में 2016 और 2017 में 1,500 अरब रुपये और 2018 के तीन महीनों में 750 अरुब रुपये निवेश करने की इच्छा जताई थी लेकिन 2016 में 90 अरब रुपये जबकि 2017 में 25 अरब रुपये और 2018 में अबतक 25 अरब रुपये के निवेश प्रस्तावों पर ही क्रियान्वयन हुआ है।
 
भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का लगभग दसवां हिस्सा कर्नाटक को मिलता है। इस लिहाज से कर्नाटक, महाराष्टï्र और सामूहिक तौर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश व हरियाणा में किए गए निवेश के बाद तीसरे स्थान पर है। कर्नाटक में जीएसटी संग्रह 240 अरब रुपये रहा। 
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