बैंक घोटालों से कर्ज के पड़ रहे लाले

रॉयटर्स |  May 16, 2018 09:59 PM IST

दो महीने पहले जब सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नैशनल बैंक में हुए दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी ने भारत को हिलाकर रख दिया था, तब चेतन हेमानी और अन्य छोटे कारोबारियों को यह सोचने के लिए माफ किया जा सकता था कि इससे हमें क्या लेना-देना? हेमानी दवा मशीनरी विनिर्माता और निर्यातक हैं। बैंक ऋण के अपने अच्छे रिकॉर्ड और अपने बैंक के साथ लंबे संबंध के भरोसे हेमानी ने सोचा था कि एक करोड़ रुपये की अपनी ऋण सीमा से ऊपर 25 प्रतिशत अधिक धन निकालने के लिए मंजूरी हासिल करना औपचारिकता से महज कुछ ही ज्यादा होगा। लेकिन एक अन्य सार्वजनिक बैंक - केनरा बैंक ने मार्च में उनका अनुरोध अस्वीकार कर दिया। हेमानी कहते हैं कि उन्होंने बैंक अधिकारियों से बातचीत करके यह जानकारी प्राप्त की कि वह भारत के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले के मद्देनजर सुरक्षा कारणों का शिकार हो गए हैं। हेमानी ने कहा कि इससे दमघुट रहा है। जब प्रभावशाली लोग पीएनबी जैसे बड़े बैंक से धोखाधड़ी करते हैं और भाग जाते हैं, तब तो उनसे कुछ नहीं होता। वे बस खुदरा उधारकर्ताओं को पीस रहे हैं। बैंकों ने भारत की अर्थव्यवस्था के सबसे जीवंत हिस्सों में से एक - सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र का गला घोंटते हुए सतर्कता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यह क्षेत्र कई वर्षों से सालाना 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यह एक ऐसा खंड भी है जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 38 प्रतिशत योगदान देता है, करीब 10 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और भारत के विनिर्माण उत्पादन का 45 प्रतिशत तथा इसके निर्यात का 40 प्रतिशत हिस्सा होता है।

 
दो साल पहले इन कमजोर कारोबारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का दंश झेला था, जिसमें कर चोरी रोकने की दृष्टिï से बिना पूर्वसूचना के रातोरात बड़े करेंसी नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। पिछले साल राष्टï्रव्यापी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को अस्त-व्यस्त तरीक से लागू करने से उन्हें एक बार फिर धक्का लगा, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए गए विभिन्न प्रकार के करों और शुल्कों को बदलना था।  केनरा बैंक ने कहा कि उसने पीएनबी धोखाधड़ी के परिणामस्वरूप नीति में परिवर्तन नहीं किया है। छोटे व्यवसायों के लिए ऋण विस्तार के संबंध में मुख्य कार्याधिकारी राकेश शर्मा ने कहा कि हम ऋण मंजूरी में काफी सतर्क थे, पहले भी सावधानी बरतते थे।
 
लेकिन इस पूरे क्षेत्र के आंकड़े बताते हैं कि ऋण में तंगी हो रही है। पीएनबी ने फरवरी के मध्य में खुलासा किया था कि वह भारी धोखाधड़ी का शिकार हुआ है। फरवरी से मार्च की अवधि में छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले उधार में 0.2 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, हालांकि अर्थव्यवस्था में कुल ऋण अदायगी 5.9 फीसदी बढ़ी है। एक साल पहले इसी अवधि में छोटे कारोबारियों की ऋण अदायगी में 5.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। छोटे कारोबारियों को ऋण देने पर केंद्रित शाखाओं में से कम से कम तीन प्रबंधकों ने कहा कि पीएनबी घोटाले के बाद वे ऋण वितरण में और अधिक कड़े हो गए हैं। एक सरकारी बैंक के शाखा प्रबंधक ने नाम जाहिर न करते हुए कहा कि हर कोई सतर्क है। हम नियम पुस्तिका का पूरी तरह पालन कर रहे हैं, ताकि कोई चूक न हो। उन्होंने कहा कि पीएनबी घोटाले के बाद सतर्कता का स्तर बहुत अधिक है और बैंकर डरे हुए हैं। पहले मैंने संकट से जूझ रहे एक कारोबार की मदद के लिए कुछ नियमों को नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन अब मैं ऐसा नहीं कर सकता। 
 
अन्य कारक
 
हालांकि, बैंकरों ने छोटे कारोबारियों को चोट पहुंचाए जाने पर अन्य वजहों का भी हवाला दिया। फरवरी में, भारतीय रिजर्व बैंक ने फंसे कर्ज की पहचान और उनके निपटारे के लिए नियमों को कड़ा कर दिया। बैंकरों ने कहा कि इसका मतलब है - कम से कम पांच करोड़ रुपये (7,44,213 डॉलर) के ऋण को 30 दिनों के भीतर भुगतान न करने की संभावित चूक के रूप में दर्ज करना और वर्गीकृत करना। इससे बड़े स्तर पर छोटे कारोबारी प्रभावित होते हैं। बैंकरों ने पीएनबी धोखाधड़ी के बाद आयातकों के लिए लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) या खरीदारों के ऋण को रोकने का भी हवाला दिया। एलऐंडटी फाइनैंस की समूह प्रमुख अर्थशास्त्री रूपा रेगे ने कहा कि पीएनबी धोखाधड़ी का व्यापारिक वित्त पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है। इससे श्रम-प्रधान उद्योगों में शामिल छोटे कारोबारों को नुकसान होता है। सरकार द्वारा संचालित बैंक की छोटी व्यावसायिक शाखा के एक अन्य प्रबंधक के अनुसार, एलओयू के इस प्रतिबंध ने कई छोटे कारोबारों को अल्पकालिक ऋण की मांग के लिए मजबूर कर दिया है। 
 
गिरफ्तारी का डर
 
कई अन्य छोटे कारोबारियों ने रॉयटर्स से कहा कि उन्होंने भी कर्ज लेने के लिए संघर्ष किया था। पीएनबी धोखाधड़ी के बाद ग्राहकों के साथ पिछले संबंधों के आधार पर कर्ज संबंधी फैसले लेने में बैंकों द्वारा अधिक सावधानी बरतने से ऐसा हुआ। मुंबई के औद्योगिक क्षेत्र में इंद्र प्रीत आनंद की एक वर्कशॉप है जिसमें छह लोग काम करते हैं। उन्होंंने रॉयटर्स से कहा कि फरवरी में 13,000 रुपये अधिक निकालने की वजह से उनके बैंक ने उन्हे अस्वीकृत कर दिया था। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक शाखा प्रबंधक ने कहा, 'मैं संबंधों के आधार पर कर्ज नहीं दे सकता, हमें सख्त होने की जरूर है। क्षेत्रीय प्रमुख कार्यालयों से नियमों का पूरी तरह से पालन करने का बहुत दबाव है।'
कीवर्ड bank, loan, debt, RBI,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक