स्वतंत्र निदेशकों पर धोखाधड़ी का असर

ऐश्ली कुटिन्हो | मुंबई Jun 12, 2018 09:36 PM IST

सिर्फ अंकेक्षक ही इस्तीफा नहीं दे रहे हैं बल्कि कंपनियों में हो रही धोखाधड़ी, खाता-बही में अनियमितता और वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून लागू होने से स्वतंत्र निदेशकों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल जनवरी से अब तक 1,000 से ज्यादा स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा दिया है। साल 2019 में इसमें खासी बढ़ोतरी हो सकती है, जब कई स्वतंत्र निदेशकों के कार्यकाल का नवीनीकरण होगा।  1 अप्रैल 2014 से कंपनी अधिनियम 2013 के प्रभावी होने के बाद वित्त वर्ष 2015 में 1,400 से ज्यादा स्वतंत्र निदेशकों ने पांच साल के कार्यकाल पर हस्ताक्षर किए थे।
 
इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, अनुपालन की अनिवार्यता में बढ़ोतरी व ज्यादा जवाबदेही के चलते इनमें से कई स्वतंत्र निदेशक अपने कार्यकाल के विस्तार का विकल्प नहीं चुनेंगे। स्वतंत्र निदेशकों के ऊपर एतराज जताने और बोर्ड के मामलों पर अपना विरोध दर्ज कराने का कानूनी व नियामकीय दायित्व है। धोखाधड़ी पकडऩे के मामले में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका नियामकों की जांच के दायरे में आ गई है क्योंकि अंकेक्षकों के साथ स्वतंत्र निदेशक भी गड़बड़ी पर सवाल उठाने के मामले में पहली पंक्ति के अधिकारी होते हैं।
 
बढ़ती भूमिका, कर्तव्य व जवाबदेही कई सालों से प्रभावी हैं, लिहाजा कंपनी अधिनियम 2013 के अलावा सेबी के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट नियम 2015 के क्रियान्वयन के मामले में स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका का महत्व बढ़ा है।  कोटक समिति की हालिया सिफारिशों में भी स्वतंत्र निदेशकों के योग्यता मानकों का विस्तार किया गया है, जो कंपनियों को प्रवर्तक समूह से जुड़े लोगों को नियुक्त करने की अनुमति नहीं देता है। सुब्रमण्यन ने कहा, नया कंपनी अधिनियम स्वतंत्र निदेशकों की जवाबदेही में काफी इजाफा करता है। विगत में हमारे पास अच्छे कानून रहे हैं, लेकिन इसके क्रियान्वयन में पिछले एक दो सालों में और सख्ती देखने को मिली है।
 
विशेषज्ञों ने कहा, ऐसा परिदृश्य हो सकता है जहां किसी इरादतन चूककर्ता के निदेशक मंडल में शामिल स्वतंत्र निदेशकों पर भी डिफॉल्टर का तमगा लग सकता है, जो विरोध न जताने के चलते या कदम न बढ़ाने के चलते हो सकता है। इन चीजों से किसी फाइनैंशियल इंटरमीडियरीज में महत्वपूर्ण पर उनकी नियुक्ति में बाधा हो सकती है। नैशनल कंपनी लॉ अपीलीय ट्रिब्यूनल ने कथित तौर पर कुछ स्वतंत्र निदेशकों की व्यक्ति संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया है, जिन्होंने नीरव मोदी की कंपनियों के निदेशक मंडल में सेवाएं दी हैं। नीरव मोदी पंजाब नैशनल बैंक के साथ बड़ी धोखाधड़ी के आरोपी हैं।
 
आईसी यूनिवर्सल लीगल के वरिष्ठ पार्टनर तेजेश चितलंगी ने कहा, कभी मशहूर रहे पद के लिए अब लोग सतर्कता बरत रहे हैं और कई स्वतंत्र निदेशक अब ऐसे पद संभालने से पहले वकीलों से कानूनी सलाह ले रहे हैं। कंपनी अधिनियम में स्वतंत्र निदेशकों को संरक्षण हासिल है। हालांकि जब गड़बड़ी होती है तो स्वतंत्र निदेशक जांच के दायरे में सबसे पहले आते हैं और कानून के तहत संरक्षण के लिए उन्हें बताना होता है कि उन्होंने भले मन से भरोसा करते हुए काम किया।  आश्चर्य नहीं होता कि स्वतंत्र निदेशक प्रवर्तकों व प्रबंधन से न सिर्फ मुश्किल सवाल पूछ रहे हैं बल्कि बोर्ड के किसी फैसले पर अपनी सहमति या विरोध को दस्तावेज के तौर पर रख रहे हैं। कुछ बाहरी वकीलों की सेवाएं ले रहे हैं और विशेषज्ञों को इसमें शामिल कर रहे हैं जिनमें वकील, खाता-बही विशेषज्ञ, फॉरेंसिक के जानकार, तकनीकी विशेषज्ञ आदि शामिल हैं ताकि उन्हें जटिल मसलों से निपटने में मदद मिल सके।
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