कार्यशील पूंजी पर सीमा से खफा उद्योग जगत

देव चटर्जी और अभिजित लेले | मुंबई Jun 12, 2018 09:38 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कार्यशील पूंजी की सुविधाओं को सीमित करने के प्रस्ताव से भारतीय उद्योग जगत चिंतित है। कंपनी जगत के वित्तीय प्रमुखों का कहना है कि आरबीआई के इस कदम से उनके कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और कई कंपनियां कर्ज भुगतान में चूक कर सकती हैं। आरबीआई ने सोमवार को प्रस्ताव किया था कि किसी कंपनी के स्वीकृत कार्यशील पूंजी का कम से कम 40 फीसदी टर्म लोन के रूप में हो। कर्जदारों के लिए फंड आधारित कार्यशील पूंजी की सीमा 1.5 अरब रुपये है और इसमें ऋण की हिस्सेदारी 40 फीसदी होगी, जो 1 अक्टूबर, 2018 से प्रभावी होगा। ऋण की 40 फीसदी हिस्सेदारी को 1 अप्रैल 2019 में बढ़ाकर 60 फीसदी किया जाएगा। 
 
एक बड़े कारोबारी घराने के मुखिया ने कहा, 'मौजूदा समय में कंपनियां अपनी कार्यशील पूंजी ऋणों का सिर्फ ब्याज चुकाती हैं और वर्ष के अंत में ऋण को आगे ले जाने में सफल रहती हैं। सीमा के 40 प्रतिशत को टर्म लोन के रूप निर्धारित करने से सभी कंपनियों के कोष की लागत बढ़ जाएगी और साथ ही बैंकों के फंसे कर्ज में भी इजाफा होगा।' उन्होंने कहा, '40 प्रतिशत टर्म लोन से लागत जुड़ी होगी जो पहले बेहद मामूली थी।' बैंक नकद ऋण, ओवरड्राफ्ट, वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन, बिलों के डिस्काउंट, बैंक गारंटी, ऋण पत्र आदि के जरिये कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया कराते हैं। नकद ऋण कार्यशील पूंजी ऋणों का बेहद लोकप्रिय विकल्प है।
 
आरबीआई ने सोमवार की अपनी पहल को उचित ठहराते हुए कहा, 'जहां नकद ऋण के अपने फायदे हैं, वहीं इससे कई नियामकीय चुनौतियां भी पैदा होती हैं।' बजाज समूह में वित्त प्रमुख प्रबाल बनर्जी ने कहा, 'मेरा मानना है कि इस कदम से भारतीय कंपनियों के लिए बैंक ऋणों में भी कमी आएगी।' बैंकरों का कहना है कि सोमवार की पहल आरबीआई द्वारा सूक्ष्म-प्रबंधन है। उन्होंने कहा, 'नियमों के उल्लंघन के बगैर वाणिज्यिक स्वतंत्रता कोष की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बैंक के साथ संबंधों के लिए बेहद जरूरी है।'
 
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष राकेश भारती मित्तल का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली में यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कार्यशील पूंजी के लिए नियमों में प्रस्तावित बदलावों से ऋण लेने वालों को कोई समस्या न हो। उन्होंने कहा, 'हम अगले कुछ दिनों में मसौदा नियमों पर सदस्यों की प्रतिक्रियाएं हासिल करेंगे।' 
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