बिक्री से पहले एयर इंडिया को मिलेंगे 3,200 करोड़ रु .!

अरूप रायचौधरी और अरिंदम मजूमदार | नई दिल्ली Jun 12, 2018 09:38 PM IST

खरीदार को आकर्षित करने के लिए एयर इंडिया की बिक्री के प्रावधानों में ढील देने की योजना
76 फीसदी की जगह 100 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर भी हो सकता है विचार
बिक्री में आ रही अड़चन पर ईवाई ने सरकार को दिए सुझाव
ईवाई ने बिक्री में बाधा के लिए चार प्रमुख कारण बताए
सचिवों की समिति जल्द ही इस मामले पर करेगी विचार
घाटे में चल रही कंपनी में नए सिरे से पूंजी डालने पर हो रहा विचार

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की विमानन कंपनी एयर इंडिया की बिक्री की शर्तों में बदलाव कर सकती है और 100 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने का निर्णय कर सकती है। एयर इंडिया के लिए नियुक्त सलाहकार ईवाई ने कहा है कि कंपनी में अल्पांश हिस्सेदारी सरकार के पास रखने जाने का प्रावधान इसकी बिक्री की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। यही वजह है कि एयर इंडिया में 76 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए अब तक कोई बोलीदाता सामने नहीं आया है।

एयर इंडिया के निजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम निजीकरण में बदलाव की संभावना तलाश रहे हैं। अभी इसमें 24 फीसदी स्वामित्व का प्रावधान रखा गया है।' बिक्री के लिए नियुक्त सलाहकार ईवाई के द्वारा बिक्री प्रक्रिया के सफल नहीं होने पर सरकार को मिले परामर्श के बाद इस दिशा में विचार किया जा रहा है। सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में ईवाई ने सौदे की राह में आने वाली चार प्रमुख कारणों का उल्लेख किया है।

इनमें सरकार द्वारा 100 फीसदी हिस्सेदारी नहीं बेचना, एक साल तक कर्मचारियों को कंपनी के साथ बनाए रखने का प्रावधान, तीन साल तक विमानन कंपनी का परिचालन बिना किसी दखल के करने पर जोर देने और कंपनी के विस्तार के लिए इच्छुक नहीं होना प्रमुख है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'एयर इंडिया के विनिवेश पर गठित सचिवों की समिति की जल्द ही इस मसले पर बैठक हो सकती है, जिसमें अगले कदम की योजना बनाई जाएगी।

समिति की सुझावों के आधार एयर इंडिया के लिए गठित मंत्रिसमूह निर्णय करेगा।' एक अन्य सरकारी अधिकारी ने कहा कि प्रस्तावित सौदे को ठंडे बस्ते में डालने की कोई वजह नहीं है, लेकिन यह अंतत: मंत्रिसमूह के निर्णय पर निर्भर करेगा। इस बीच सरकार एयर इंडिया में 3,200 करोड़ रुपये की पूंजी और डाल सकती है। लगातार घाटे में चल रही इस एयरलाइन में सरकार अप्रैल 2012 में घोषित बेलआउट पैकेज के तहत पहले ही 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की पूंजी डाल चुकी है।

दरअसल एयर इंडिया में नए सिरे से पूंजी डालना सरकार के लिए जरूरी हो गया है। दरअसल कर्जदाता कंसर्टियम के तीन बैंकों ने इस एयरलाइन को आगे 'लाइन ऑफ क्रेडिट' देने से इनकार कर दिया है। 'लाइन ऑफ क्रेडिट' बैंक और कर्जदार के बीच होने वाला एक समझौता होता है जिसके तहत कर्जदार कभी भी तय सीमा के मुताबिक उधारी ले सकता है।

एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एयरलाइन की आर्थिक स्थिति खराब होने से नई पूंजी डालना जरूरी हो गया है। अपने कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी की वजह बताते हुए इस अधिकारी ने कहा कि देना बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और इलाहाबाद बैंक विनिवेश प्रक्रिया के चलते आशंकित हैं और इसी वजह से इन बैंकों ने उधारी सीमा बढ़ाने से मना कर दिया है।

एयर इंडिया के कर्मचारियों को मई महीने का वेतन अभी तक मिला नहीं है। एयरलाइन की महाप्रबंधक (औद्योगिक संबंध) मीनाक्षी कश्यप ने कर्मचारियों को लिखे एक पत्र में 15 जून को वेतन का भुगतान किए जाने की संभावना जताई है। एयर इंडिया के पायलटों की संस्था ने प्रबंधन को एक पत्र लिखकर कहा है कि वित्तीय अनिश्चितता निराशा, चिंता और तनाव की स्थिति है जिससे विमानन कंपनी की सुरक्षा पर असर पड़ता है।

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