यूपीएफसी की संपत्तियां कुर्क

बीएस संवाददाता | लखनऊ Aug 22, 2017 10:02 PM IST

उत्तर प्रदेश में उद्योगों को कर्ज देने वाली संस्था उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (यूपीएफसी) दिवालिया हो गई है। खुद का कर्ज नहीं चुकाने की वजह से यूपीएफसी की संपत्तियों को कुर्क कर लिया गया। मुख्यालय सहित कई संपत्तियों के कुर्क हो जाने के बाद अब यूपीएफसी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
यूपीएफसी कर्ज वसूली पंचाट (डीआरटी) के कुर्की के आदेश की वैधता को चुनौती देगा। निगम का कहना है कि जिस कर्ज को न चुकाने के चलते उसकी संपत्तियां कुर्क की गई हैं उसके एवज में बंधक के तौर पर अन्य कर्जदारों की संपत्ति रखी गई थी न कि यूपीएफसी की।
42,000 औद्योगिक इकाइयों को 32,000 करोड़ रुपये ज्यादा का कर्ज दे चुके यूपीएफसी पर यह कार्रवाई सिडबी का 601.48 करोड़ रुपये का कर्ज न चुकाने के चलते की गई है। यूपीएफसी के मुख्य प्रबंधक व सचिव सीएस बग्गा के अनुसार डीआरटी के आदेश पर निगम के कानपुर मुख्यालय सहित वाराणसी और आगरा की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। उनका कहना है कि वित्तीय निगम इस आदेश के खिलाफ जल्द ही उच्च न्यायालय जाएगा। बग्गा के मुताबिक सिडबी के कर्ज के करण में बंधक के तौर पर यूपीएफसी ने जो संपत्तियां रखी थीं वह उसके कर्जदारों की थीं। ऐसे में कर्जदार उद्यमियों की संपत्तियां कुर्क होनी चाहिए न कि यूपीएफसी की।
डीआरटी के आदेश पर यूपीएफसी की कुल 54 संपत्तियां सोमवार को कुर्क की गई हैं। आदेश में कहा गया था कि यूपीएफसी की संपत्तियां कुर्क कर सिडबी को रकम वापस दिलाई जाए।
यूपीएफसी अधिकारियों के मुताबिक निगम के पास इस कर्ज की रकम चुकाने के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है। पिछले काफी समय से खराब वित्तीय हालात के चलते यूपीएफसी से नई औद्योगिक इकाइयों को कर्ज देने का काम बंद है। यूपीएफसी पर सिडबी का 372 करोड़ रुपये बकाया है जो ब्याज जोड़ कर 601.48 करोड़ रुपये हो गया है। इसी बकाया रकम की वापसी को लेकर सिडबी ने डीआरटी में मुकदमा दायर किया था।

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