लालू की रैली में दिखा तेजस्वी यादव का तेज

सत्यव्रत मिश्रा | पटना Aug 27, 2017 09:59 PM IST

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते महीने भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देकर भले ही राजद को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था लेकिन इससे पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव की लोकप्रियता बढ़ी है। इस बात का नजारा रविवार को यहां राजद की बहुप्रतीक्षित रैली में साफ  देखने को मिला। राजद की  'भाजपा भगाओ, देश बचाओ' रैली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस के बिहार प्रभारी सीपी जोशी, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, जदयू के बागी शरद यादव, झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन, झारखंड विकास मोर्चा के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी समेत करीब एक दर्जन से ज्यादा दलों के नेताओं ने शिरकत की। इस रैली का मकसद केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की नीतीश सरकार के खिलाफ  विपक्षी दलों की एकता को दिखाना था। दिग्गज विपक्षी नेताओं की गैर-मौजूदगी के बावजूद यह रैली अपनी छाप छोडऩे में कामयाब रही। 
 
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित इस रैली में राजद और सहयोगी दलों के 50 हजार से ज्यादा समर्थकों का हुजूम देखने को मिला। रैली की वजह से आसपास के इलाकों में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। हालांकि राजद की पिछली रैलियों के मुकाबले इस बार लोग ज्यादा संयमित थे और पूरी तरह कानून व्यवस्था का पालन कर रहे थे। इस रैली से लालू प्रसाद की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव का राष्ट्रीय राजनीति में भी पदार्पण हुआ। खुद लालू प्रसाद ने अपने पुत्र की उपलब्धियां खूब गिनाईं। उनके मुताबिक तेजस्वी की बढ़ती लोकप्रियता ही महागठबंधन के अंत का कारण बनी। लालू ने कहा, 'नीतीश कुमार को तेजस्वी की बढ़ती लोकप्रियता से जलन होती थी। उसने राज्य के विकास के लिए काफी काम किया और किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहा।'
 
वहीं तेजस्वी ने भी अपने 'नीतीश चाचा' पर खूब जुबानी तीर चलाए। उन्होंने कहा, 'नीतीश जी हमारे चाचा थे और रहेंगे। लेकिन वह अच्छे चाचा नहीं हैं। वह कहा करते थे कि संघमुक्त भारत बनाएंगे लेकिन आज संघ की गोद में जाकर बैठ गए। हमारे प्यारे नीतीश चाचा और भाजपा की उल्टी गिनती आज से शुरू हो गई है। असली जदयू शरद चाचा के साथ है।' रैली मे कई नेताओं ने खुले मन से तेजस्वी की तारीफ  की। साथ ही कुछ ने तो उन्हें बिहार का भावी नेता भी करार दिया। जब-जब मंच से तेजस्वी या लालू प्रसाद की तारीफ  होती थी, रैली में मौजूद भीड़ से तालियों की तेज गडग़ड़ाहट सुनाई देती थी। भीड़ से 'देश का नेता कैसा हो, तेजस्वी यादव जैसा हो' के नारे सुनाई देते थे। रैली में सबसे बड़ी तादाद युवाओं की नजर आ रही थी। यह पार्टी में एक बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव की ओर इशारा है। दूसरी तरफ रैली के मंच से लालू प्रसाद ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि तेजस्वी भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति मे विपक्षी एकता तैयार करने के लिए अहम भूमिका निभाने को तैयार है। तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी ने केंद्र पर जांच एजेंसियों का डर दिखाकर विपक्षी आवाज को दबाने का आरोप लगाया।
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