विकास कार्यों में जीएसटी की अड़चन

सुशील मिश्र | मुंबई Sep 11, 2017 09:58 PM IST

उलझन में कारोबार

दरों में बदलाव के कारण महाराष्ट्र में करीब 6,000 करोड़ रुपये की निविदाएं रद्द

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद सरकार जहां इसके फायदे गिना रही है, वहीं कारोबारी अब तक इसके क्रियान्वयन और मूल्यांकन में ही उलझे हैं। जीएसटी के कारण विकास कार्य भी अटक सा गया है। महाराष्ट्र में करीब 6,000 करोड़ रुपये की निविदाओं  को रद्द कर दिया गया है। जीएसटी के पहले मंगाई गई निविदाओं के रद्द किए जाने से ठेकेदारों के साथ स्थानीय विधायक और नगरसेवक व निकाय अधिकारियों में भी नाराजगी है।

सरकारी निविदाओं में जीएसटी का पेच फंसने से 1 जुलाई के पहले यानी जीएसटी लागू करने से पहले मंगाई गई निविदाओं को रद्द करने का आदेश दिया गया है। निविदाएं रद्द करने की दूसरी सबसे बड़ी वजह हाल ही मेंं जीएसटी दरों में किया गया बदलाव बताया जा रहा है। सरकार ने निविदाओं में जीएसटी दर 18 से घटाकर 12 फीसदी कर दिया है।

निविदा रद्द होने से राज्य में चल रहे व शुरू होने वाले विकास कार्य अटक गए हैं। महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार कहते हैं कि इससे सरकार को फायदा होगा जिसका लाभ राज्य की जनता को मिलेगा। पूरे राज्य में करीब 6,000 करोड़ रुपये की निविदा मंगाई गई हैं। इस पर पहले 18 फीसदी जीएसटी लागू की गई थी लेकिन बाद में जीएसटी परिषद ने इसे घटाकर 12 फीसदी कर दिया। इस तरह देखा जाए तो राज्य सरकार को 360 करोड़ रुपये का फायदा हो रहा है। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, मीरा-भायंदर, वरुई विरार, उल्हास नगर सहित करीब सभी महानगरपालिकाओं में निविदा रद्द कर दिए गए हैं। विपक्ष भी सरकार के इस कदम पर आपत्ति जता रहा है।

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