सरदार सरोवर बांध के उद्घाटन फैसले का विरोध

भाषा | नई दिल्ली Sep 14, 2017 09:57 PM IST

नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने सरदार सरोवर बांध के उद्घाटन के केंद्र सरकार के फैसले का विरोध करते हुए बांध के कारण प्रभावित करीब 40 हजार परिवारों का पुनर्वास किए बिना बांध के दरवाजे बंद किए जाने की निंदा की। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के सामने आज विरोध प्रदर्शन किया। नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के बाद मंत्रालय को एक ज्ञापन भी सौंपा। हालांकि कार्यकर्ताओं की जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात नहीं हो सकी।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को सरदार सरोवर बांध का उद्घाटन करके इस परियोजना को देश को समर्पित करने वाले हैं। आंदोलन की ओर से मंत्रालय को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार नर्मदा नहर के निर्माण के बगैर बांध के दरवाजे बंद करने से इससे लाभान्वित होने वाले इलाकों में पीने अथवा सिंचाई का पानी भी नहीं पहुंच सकेगा। इसमें कहा गया कि बांध के दरवाजे बंद करने से इस बांध की ऊंचाई बढ़कर 138 मीटर हो जाएगी और इसके कारण 192 गांवों के करीब 40 हजार परिवारों के आवास जलमग्न हो जाएंगे। 
 
एनबीए ने कहा कि मध्य प्रदेश के अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन जिलों के 192 गांवों के अलावा धार जिले का एक शहर धरमपुरी भी डूब क्षेत्र में है। नर्मदा के डूब क्षेत्र में महाराष्ट्र के 33 और गुजरात के 19 गांव भी शामिल हैं। यह सभी पूर्णत: आदिवासी गांव हैं, जिसमें से महाराष्ट्र के सात पहाड़ी गांवों को वनग्राम का दर्जा मिला है। राजधानी दिल्ली में नर्मदा बचाओ आंदोलन की अगुआई करने वाली एवं मेधा पाटकर की सहयोगी कार्यकर्ता उमा ने कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवमानना है।
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