तमांग बनाए गए जीटीए के चेयरमैन

अभिषेक रक्षित | कोलकाता Sep 20, 2017 09:58 PM IST

दार्जिलिंग के पहाड़ी इलाकों में लंबे समय से जारी गतिरोध दूर करने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार और दार्जिलिंग के राजनीतिक संगठनों के बीच वार्ता के बार-बार विफल रहने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) को पुनर्गठित करने के लिए कदम उठाया है। जीटीए को नए सिरे से गठित करते हुए ममता ने विरोधी गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के नेता बिनय तमांग को इसका चेयरमैन बनाया है।

 
केंद्र, राज्य सरकार और पहाड़ी इलाकों के राजनीतिक दलों के त्रिपक्षीय समझौते के बाद जीटीए का गठन 2011 में किया गया था, जिसे उत्तरी पश्चिम बंगाल के पहाड़ी इलाकों के प्रशासन का अधिकार दिया गया था। हालांकि गोरखालैंड को अलग राज्य बनाने का आंदोलन जोर पकडऩे के बाद जेटीए के तत्कालीन चेयरमैन जीजेएम प्रमुख बिमल गुरूंग सहित सभी 45 निर्वाचित सदस्यों ने इस साल जून में इससे इस्तीफा दे दिया था। 
 
इसकी वजह से पिछले तीन माह से जीटीए शिथिल पड़ा था और विकास का कोई कार्य नहीं हो पा रहा था। बनर्जी ने कहा, 'हम जीटीए को लंबे समय तक शिथिल रहने नहीं दे सकते। विकास कार्य कराने की जरूरत है और हम नहीं चाहते कि पहाड़ी इलाके का विकास रुक जाए।' पहाड़ी क्षेत्र के लिए राज्य प्रशासन काा अहम हिस्सा होने की वजह से जीटीए का पुनर्गठन किया गया है। बनर्जी ने जीटीए कानून की धारा 65 (बी) के तहत तमांग को इसका चेयरमैन और उनके करीबी तथा जीजेएम नेता अनिल थापा को  वाइस चेयरमैन नियुक्त किया है। जीटीए के 9 सदस्यीय बोर्ड में जीएनएलएफ के अध्यक्ष एम घीसिंग और जीजेएम के दार्जिलिंग से विधायक अमर सिंह रवि को भी शामिल किया गया है।
 
बनर्जी ने कहा, 'पहाड़ी इलाके का विकास अब जोर पकड़ेगा। जीटीए में राज्य के सभी पहाड़ी इलाके का प्रतिनिधित्व है। चुनाव होने तक ये सभी काम करेंगे।' बनर्जी ने कहा कि फिलहाल चुनाव कराना सही नहीं होगा और जब स्थिति ठीक होगी तो जल्द चुनाव कराया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में सामान्य जन-जीवन बहाल करने के लिए तमांग और राय ने कोलकाता में बनर्जी से मुलाकात की थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री बनर्जी ने यह कदम उठाया। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भी बंद को अवैध करार दे चुका है।
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