मढ़ौरा परियोजना की राह हुई मुश्किल

शाइन जैकब | नई दिल्ली Sep 22, 2017 09:43 PM IST

बिहार के मढ़ौरा में प्रस्तावित डीजल इंजन कारखाने की मुश्किलें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। रेलवे ने इस कंपनी का ठेका अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक को दिया था। एक दिन पहले खबर आई थी कि रेलवे कंपनी को इस कारखाने में इलेक्ट्रिक इंजन बनाने का विकल्प दे सकती है। लेकिन रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि इस तरह की पेशकश की संभावना नहीं है।
इस मामले से करीब से जुड़े अधिकारी ने कहा, 'हम अगले 3-4 सालों में रेल लाइनों के शत प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। अभी यह 42 फीसदी है। इसलिए हमारी डीजल इंजन लगाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अब चूंकि इसका आवंटन बोली प्रक्रिया के जरिये हुआ है और डीजल तथा इलेक्ट्रिक इंजन की कीमतें पूरी तरह अलग हैं, इसलिए यह विकल्प व्यावहारिक नहीं है। यही वजह है कि इसकी संभावना नहीं के बराबर है।' अलबत्ता रेल मंत्री पीयूष गोयल और जीई के अधिकारियों की गुरुवार को रेल भवन में हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी। लेकिन परियोजना से पल्ला झाडऩे पर भी रेलवे को भारी चपत लग सकती है।
गोयल के रेल मंत्रालय का पद संभालने के बाद 7 सितंबर को हुई समीक्षा बैठक में मढ़ौरा परियोजना को बंद करने का सुझाव दिया गया था। रेलवे ने नवंबर 2015 में जीई को मढ़ौरा में डीजल इंजन कारखाना और ऑल्सटॉम को मधेपुरा में इलेक्ट्रिक इंजन कारखाना बनाने का ठेका दिया था। ये दोनों परियोजनाएं 40,000 करोड़ रुपये की थीं। अधिकारी ने कहा, 'दोनों ठेके अलग-अलग दरों पर दिए गए थे, इसलिए मढ़ौरा कारखाने को इलेक्ट्रिक इंजन कारखाने में बदलना बहुत जटिल प्रक्रिया हो सकती है।'
केवल मढ़ौरा परियोजना पर 2,052 करोड़ रुपये का निवेश होना था और अगले दस साल के दौरान वहां कम से कम 1,000 डीजल इंजन बनाए जाने थे।

कीवर्ड bihar, मढ़ौरा, डीजल इंजन,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक