जीएसटी ने बदली विज्ञापन प्रिंटिंग कारोबार की सूरत

अभिषेक रक्षित |  Sep 26, 2017 09:03 PM IST

दुर्गा पूजा का रंग फीका पड़ने की आशंका

जिन प्रिंटिंग कंपनियों का जीएसटी के तहत पंजीयन नहीं हुआ है, उनमें ज्यादातर जुड़ी हैं फोटोकॉपी, फोटोग्राफी और डिजाइनिंग स्टूडियो आदि दूसरे कारोबारों से।
विज्ञापन का बाजार इस साल 13.5 फीसदी बढ़कर 56,152 करोड़ रु. हो सकता है, जो 2016 में 49,480 करोड़ रु. रहा था

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कारण अगले साल से पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा का रंग फीका पड़ने का खतरा मंडरा रहा है। जीएसटी के कारण विज्ञापन कारोबार से जुड़े कई छोटे प्रिंटरों के लिए अगली पूजा में कारोबार कम हो जाएगा, जिससे पूजा के दौरान दिखने वाला उत्साह ठंडा पड़ सकता है। जीएसटी लागू होने के बाद कंपनियां इनपुट टैक्स क्रे डिट को लेकर काफी सजग हो गई हैं। इसकी वजह यह है कि मूल्य वर्धित कर (वैट) से उलट नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में इनपुट टैक्स क्रेडिट का पूर्ण दावा किया जा सकता है। पहले विज्ञापन दाता प्रिंट मीडिया, आउटडोर बिलबोर्ड्स, टेलीविजन और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अन्य माध्यमों में विज्ञापनों के लिए सेवा कर की वापसी का दावा कर सकते थे। लेकिन अब विज्ञापनदाता पूरे 18 प्रतिशत कर के लिए दावा ठोक सकते हैं। 

इस बारे में ओम एंटरप्राइजेज के सरजीत साधुखान कहते हैं, 'पूजा के दौरान भी ऐसा देखने को मिला है। प्रायोजक बिलबोड्र्स के लिए अब डीटीपी (डेस्कटॉप पब्लिशिंग) कंपनियों और उन दूसरी विज्ञापन एजेंसियों से काम कराना चाहती हैं, जो जीएसटी के तहत आती हैं।' साधुखान उन कई डीटीपी और फ्लेक्स प्रिंटिंग निर्माताओं में शुमार हैं, जो जीएसटी के दायरे में नहीं आते हैं क्योंकि उनका सालाना करोबार 20 लाख रुपये से कम है। इसका नतीजा यह हुआ है कि इस साल उनका कारोबार करीब 10 प्रतिशत कम हो गया है। उन्हें लगता है कि अगले साल दुर्गा पूजा के दौरान उनके कारोबार लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 

प्रोग्रेसिव एंटरप्राइजेज के रामकृष्ण मंडल ने भी ऐसी ही चिंता जताई है। मंडल के साल भर के कारोबार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दुर्गा पूजा के दौरान डिजाइनिंग एडवर्टाइजिंग आर्टवर्क एवं प्रिंटिंग बैनर और फ्लेक्स से ही आता है। ज्यादातर काम पूजा आयोजक अजेय संघाटी क्लब के पूजा आयोजकों की ओर से आता है। सिंघी पार्क दुर्गा पूजा कमेटी के एक आयोजनकर्ता ने कहा, 'प्रतिमा बनाने वाले कारीगरों से लेकर सजावट करने वालों और प्रिंट करने वाली कंपनियों की हिस्सेदारी पूजा के बजट में अधिक होती है। लेकिन मुझे लगता है कि अगले साल से प्रायोजक इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना चाहेंगे, जिससे जीएसटी के तहत आने वाले संगठित क्षेत्र का पूजा के दौरान दबदबा बढ़ जाएगा।' सिंघी पार्क दुर्गा पूजा दक्षिण कोलकाता में मझोले बजट की पूजा है। 

एक अन्य आयोजक बरीशा क्लब दुर्गा पूजा कमेटी का मानना है कि अगले साल से कंपनियां उन पूजा समितियों का प्रयोजन करेंगी, जो सबसे पहले तो अधिक भीड़ आकर्षित करेंगी और जिनमें विभिन्न प्रायोजनों के लिए जीएसटी के मुताबिक अच्छा बिल मिल सकेगा। परफेक्ट ऑफसेट प्रिंटर्स के मालिक सृजन चक्रवर्ती इसे सकारात्मक बदलाव मानते हैं और उनका कहना है कि दीर्घ अवधि में इससे कारोबार बढ़ने में मदद मिलेगी। कंपनी के पास जीएसटी पंजीयन सख्या हैं और यह टाटा मोटर्स, स्टार सीमेंट, फॉर्च्‍युन ग्रुप और अन्य कंपनियों के साथ जुड़ी है। 

एवरेडी इंडस्ट्रीज में प्रबंध निदेशक अमृतांशु खेतान का कहना है कि विज्ञापन एवं प्रिंटिंग कंपनियों को ऑर्डर देते समय इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे का पहलू खासा महत्त्वपूर्ण हो जाता है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के प्रायोजन पर भी यह बात लागू होती है। खेतान ने ने इस साल पहली बार लाइट एवं छोटे उपकरणों के लिए विज्ञापन अभियान शुरू किया है। इस साल एवरेडी टेलीविजन पर प्रचार अभियान चला रही है और सबसे अच्छी पूजा आयोजित करने वाली आवासीय समितियों और संगठनों के लिए उसने प्रतिस्पद्र्धा का भी आयोजन किया है।

पिच मेडिसन एडवर्टाइजिंग की हाल में आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में विज्ञापन का बाजार इस साल 13.5 प्रतिशत बढ़कर 56,152 करोड़ रुपये हो सकता है, जो पिछले साल 49,480 करोड़ रुपये रहा था। इस उद्योग के लोगों के अनुसार कोलकाता की देश के कुल विज्ञापन बाजार में हिस्सेदारी करीब 5 से 8 प्रतिशत होती है और पूजा के दिनों में सालाना विज्ञापन राजस्व का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा मिल जाता है।

विज्ञापन बाजार को संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों में बांटने के लिए आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन मोटे तौर पर यह माना जाता है कि 40 प्रतिशत बाजार संगठित क्षेत्र के अंदर आता है। ज्यादातर प्रिंटिंग कंपनियां, जिनके पास जीएसटी पंजीकरण नहीं है, फोटोकॉपियर्स, फोटोग्राफी और डिजाइनिंग स्टूडियोज तथा संबंधित कारोबार भी चलाती हैं। इनमें ज्यादातर ने कहा कि अगले साल दुर्गा पूजा के दौरान उनका प्रिंटिंग कारोबार कम रहा तो उन्हें अपने वैकल्पिक कारोबार पर आश्रित रहना होगा। मगर इसमें कोई शक नहीं कि अगले साल पूजा 'अधिक संगठित' बनने जा रही है।
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