पिता-पुत्र में रार खत्म होने के आसार

बीएस संवाददाता | लखनऊ Sep 28, 2017 09:41 PM IST

मुलायम सिंह यादव का पहले अलग पार्टी बनाने से इनकार और अब पुत्र अखिलेश यादव से तीन महीनों की दूरी के बाद अकेले में मुलाकात कुछ अलग कहानी बयां कर रही है। समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने करीब-करीब यह साफ कर दिया है कि पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई में वे बेटे अखिलेश के ही साथ हैं, भाई शिवपाल यादव के नहीं। मुलायम और अखिलेश की आज हुई मुलाकात ने यह साफ कर दिया है कि समाजवादी पार्टी का विभाजन तय है। आज के एक सप्ताह बाद होने वाले समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के बाद शिवपाल यादव के सियासी रास्ते अलग होने के आसार दिख रहे हैं।
 
पार्टी के प्रवक्ता के अनुसार गुरुवार को अखिलेश ने मुलायम के पास गिले शिकवे दूर करने और आगरा में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण देने गए थे। मुलायम ने पुत्र का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।आगरा में होने वाले सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होना है।  इसके पहले 23 सितंबर को राज्य सम्मेलन में अखिलेश यादव ने कहा था कि नेता जी का आशीर्वाद उनके साथ है। इसके अलावा 25 सितंबर को मुलायम ने लोहिया ट्रस्ट में बुलाई गई कॉन्फ्रेंस में प्रेस नोट के उस पेज को नहीं पढ़ा था जिसमें एक नई पार्टी-संगठन बनाने का जिक्र था।
 
हालांकि 25 सितंबर को मुलायम सिंह ने कहा था कि वे 5 अक्टूबर को आगरा में होने वाले पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग नहीं लेंगे। गौरतलब है कि इसके पहले 23 सितंबर को पार्टी के राज्य सम्मेलन में मुलायम सिंह को आमंत्रित नहीं किया गया था। वहीं मुलायम सिंह द्वारा कभी इशारों-इशारों में तो कभी खुलकर अखिलेश को उनके द्वारा अध्यक्ष पद को लेकर की गई वादाखिलाफी की याद भी दिलाई है।
 
अखिलेश और मुलायम की मुलाकात के बाद चाचा शिवपाल यादव पर अब उनके समर्थकों द्वारा अलग संगठन बनाने का दवाब भी बढ़ गया है।  चार दिन पहले मुलायम की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शिवपाल यादव द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई गई थी जिसे अंतिम क्षणों में रद्द कर दिया गया था। शिवपाल समर्थक मुलायम सिंह के इस रवैये से काफी नाराज हैं जिससे शिवपाल पर अलग पार्टी बनाने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि शिवपाल यादव प्रेस कॉन्फ्रेंस रद्द करने के बाद दोहराया गया था कि नेताजी का फैसला अंतिम होगा। लेकिन जानकारों की मानें तो शिवपाल अक्टूबर के दूसरे हफ्ते तक नई पार्टी या मंच बनाने का फैसला कर सकते हैं।
कीवर्ड mulayam singh yadav, akhilesh yadav, shivpal yadav,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक