नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार से कारोबारी बेजार

संदीप कुमार | भोपाल Oct 05, 2017 09:48 PM IST

पिछले वर्ष 8 नवंबर को घोषित नोटबंदी और इस वर्ष 1 जुलाई से लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने मध्य प्रदेश के कारोबारियों को लगातार मुसीबतों में डाल रखा है। प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक संगठनों का कहना है कि अभी नोटबंदी की चोट कम भी नहीं हुई थी कि जीएसटी के रूप में उन्हें दूसरा झटका लग गया। इस बीच, सीमा पर तनावपूर्ण हालात से बाजार में चीन का माल भी कम देखने को मिल रहा है। 

 
उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार की मंशा और उसके क्रियान्वयन के बीच संतुलन का अभाव है। इंदौर के अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष सुशील सुरेका ने कहा कि नोटबंदी के बाद से जारी मंदी अब और मुखर हो गई है। उन्होंने कहा, 'भारत के जीएसटी ढांचे में खामियां हैं, वहीं नई कर प्रणाली के अनुपालन में गड़बडिय़ों ने कारोबारियों को मुसीबत में डाल दिया है। सरकार ने जीएसटी लागू करने में जल्दबाजी की गई है।'
 
रीफंड में देरी जीएसटी की एक बड़ी खामी बनकर उभरी है। सुरेका के अनुसार निर्यातकों को अगर रीफंड मिलने में देरी होती रही तो उनके पास कारोबार के लिए जरूरी कार्यशील पूंजी तक नहीं रह जाएगी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राधेश्याम माहेश्वरी का कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी को लेकर सरकार की मंशा भले ही अच्छी थी, लेकिन इन दोनों ही मौकों पर सरकार की तैयारी बहुत कमजोर थी।
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