'जंगल से लौटा तब मेरा मकान जल रहा था'

बीएस संवाददाता | जगदलपुर Oct 08, 2017 10:01 PM IST

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले में  6 फरवरी 2015 के बाद पहली बार टीएमटीडी न्यायिक जांच आयोग के समक्ष ताड़मेटला का गवाह सामने आए। केंद्रीय जेल में बंद 3 बंदियों में से कवासी भीमा ने कहा कि सुबह 8 बजे के करीब फोर्स के जवानों के गांव की ओर आने की खबर मिली, जिसके बाद सारे मर्द जंगल की ओर भाग निकले। 9 बजे जब लौटे तो गांव के सभी लोगों के मकान जल रहे थे। इन मकानों में कवासी भीमा का मकान भी था। उसकी पत्नी ने बताया कि वर्दीवाले आए थे और घरों को आग लगा दी। गवाहों के मुताबिक फोर्स के लोग गांव के मर्दों की बेबात पिटाई करते हैं, जबकि महिलाओं के साथ मारपीट नहीं की जाती। यही वजह है कि जब भी गांव में फोर्स आती है, सारे मर्द जंगल की ओर चले जाते हैं और उनके लौटने के पश्चात वापस आते हैं। सीआरपीएफ की ओर से वकालत कर रहे हाईकोर्ट के अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह ने क्रॉस एक्जामिनेशन में कुछ सवाल पूछे, जिसका जवाब ग्रामीणों ने दिया। गोंडी बोली के जानकार तीनों गवाहों के लिए दुभाषिए की व्यवस्था थी। ज्ञात रहे कि 11 से 15 मई 2011 के बीच ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर गांव के 250 लोगों के घर कथित तौर पर फोर्स द्वारा जलाए जाने के आरोपों के बाद जस्टिस टीपी शर्मा की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया था।
कमिश्नर कार्यालय स्थित आयोग के दफ्तर में सुनवाई में पेश हुए 3 गवाहों के अलावा आयोग की ओर से ताड़मेटला के 15 लोगों को नोटिस जारी की गई थी। ताड़मेटला के सरपंच के मुताबिक इनमें से 7 लोग मिर्ची तोडऩे आंध्र गए हुए हैं और बाकी लोगों ने बारिश और किसानी का सीजन होने के चलते आने में असमर्थता जाहिर की। अब ताड़मेटला के 116 और तिम्मापुर के 52 लोगों की गवाही होनी शेष है। आयोग के समक्ष 185 लोगों ने गवाही दी है।
नंदिनी सुंदर का जिक्र
तीनों गवाहों कवासी भीमा, मुचाकी नंदा और माड़वी कोसा ने अपने बयान में समाजसेवी नंदिनी सुंदर के गांव आने का जिक्र किया। कवासी भीमा के मुताबिक वह ट्रैक्टर में चावल की बोरियां लेकर आती थी, जिसका वितरण गांव वालों में किया जाता था।
रुपये-बर्तन-कपड़े मिले
गवाहों के मुताबिक घर जलने के बाद सरकार की ओर से 50 हजार रुपये नगद, बर्तन, कपड़ा, बांस और बल्ली दिया गया। इससे उन्होंने फिर से अपने मकान खड़े किए। जहां वे अब रह रहे हैं। 22 जुलाई से तीनों केंद्रीय जेल जगदलपुर में नक्सल मामले में विचाराधीन हैं।

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