महाराष्ट्र का पहला नकदीरहित गांव खो रहा पहचान

बीएस संवाददाता |  Oct 08, 2017 10:15 PM IST

महाराष्टï्र का पहला और एकमात्र कैशलेस विलेज (यानी नकदीरहित गांव) धसई अपनी यह पहचान लंबे समय तक कायम रखने में सफल नहीं रहा है। धसई गांव के निवासी अब इलेक्ट्रॉनिक डेटा कैप्चर (ईडीसी) मशीन पर अपना कार्ड स्वाइप करते नहीं दिखते। यहां ज्यादातर लेनदेन अब नकदी में ही होता है।
नकदी इस्तेमाल करना सुविधाजनक इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि लोग इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पसंद नहीं करते हैं। साथ ही इसके लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर अन्य दूसरा कारक है। इस गांव को नकदीरहित बनाने की मुहिम में शामिल रही धसई मर्चेंट्ïस एसोसिएशन के अध्यक्ष स्वप्निल पाटकर कहते हैं, 'सरकार ने कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देना तो शुरू कर दिया लेकिन वह यह भूल गई कि इसके लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी। कार्ड स्वाइप मशीनों को टेलीफोन कनेक्शन से जोड़े जाने की जरूरत है जिससे कि वे हर समय काम करती रहें और उनके लिए नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है। मोबाइल और लैंडलाइन नेटवर्क को लेकर भी यहां बड़ी समस्या है। कभी कभी तो हमें पूरे सप्ताह इन सुविधाओं के बगैर रहना पड़ता है। बिजली कटौती भी नियमित हो गई है।'
कुछ दुकानदारों का कहना है कि उनका 5-15 फीसदी कारोबार ही कार्ड द्वारा होता है और वह भी तब जब लेनदेन 1500-2000 रुपये से अधिक हो। बैंक ऑफ बड़ौदा ने बगैर किसी सिक्योरिटी डिपोजिट (जो 10,000 रुपये है) के ईडीसी वितरित किए थे और 600 रुपये सालाना का मासिक किराया भी माफ किया था। ईडीसी की व्यवस्था करने वाले स्वतंत्र्य वीर सावरकर राष्टï्रीय स्मारक के चेयरमैन रंजीत सावरकर कहते हैं, 'लोग यहां नकदी के इस्तेमाल की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन थोक विक्रेताओं के लिए दुकानदारों से किया जाने वाला 90 प्रतिशत भुगतान अभी भी चेक या कार्ड के जरिये होता है।'
इस गांव में दो शाखाएं (विजया बैंक और ठाणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक की) हैं। पाटकर कहते हैं कि कई अनुरोधों के बावजूद किसी भी बैंक ने खाताधारकों को कार्ड जारी नहीं किए हैं और न ही ग्राहकों को इसके फायदों के बारे में अवगत कराने की कोशिश की गई है। पाटकर के अनुसार ठाणे डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के लगभग 27,000 खाते हैं, लेकिन उसने सिर्फ 2,200 कार्ड ही जारी किए हैं। विजया बैंक के 17,000 खाते हैं और उसने लगभग 4,000 खाताधारकों को कार्ड जारी किए हैं। जब बिजनेस स्टैंडर्ड ने इन शाखाओं से संपर्क किया तो दोनों बैंकों के अधिकारियों ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ हमसे बातचीत की। उन्होंने इन आंकड़ों की पुष्टिï की और कहा कि यह बैंक की नीति है कि जब कोई ग्राहक अनुरोध करता है तभी उसे कार्ड जारी किए जाते हैं। ज्यादातर खाताधारकों ने डेबिट कार्ड के लिए आवेदन ही नहीं किया है। विजया बैंक के एक अधिकारी ने कहा, 'हमारी सबसे बड़ी चुनौती डेबिट कार्ड जारी करना है क्योंकि ज्यादातर खाताधारक पढ़े-लिखे नहीं हैं। इसलिए वे एटीएम मशीन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।'

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