सरकार से टकराव की राह पर ट्रांसपोर्टर

सुशील मिश्र | मुंबई Oct 08, 2017 10:20 PM IST

ट्रांसपोर्टर हड़ताल

टोल पर सरकारी चुप्पी से नाराज ट्रांसपोर्टर ने दी 9 और 10 अक्टूबर को देश भर में चक्काजाम की चेतावनी
ट्रांसपोर्टरों का दावा, टोल नाकों पर होता है 40-45 प्रतिशत का घोटाला

डीजल की कीमतों बढ़ोतरी और दाम में हर दिन बदलाव से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। इसके साथ ही टोल के झोल पर सरकारी चुप्पी से नाराज ट्रांसपोर्टर एक बार फिर हड़ताल की राह पर चल पड़े हैं। टोल नाका (प्लाजा) पर देरी से सालाना करीब 1.48 लाख करोड़ रुपये रुपये का नुकसान होता है जबकि सरकार को सालाना टोल से 19 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। ट्रांसपोर्टरों का दावा है कि टोल नाकों पर 40-50 फीसदी का घोटाला होता है। अपनी विभिन्न मांगों के लेकर ट्रांसपोर्टर 9 अक्टूबर से देशव्यापी हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के चेयरमैन बल मलकीत सिंह कहते हैं कि ट्रासपोर्टर कर खत्म करने की बात नहीं कर रहे हैं बल्कि टोल प्लाजा को बंद करने की मांग की जा रही है। टोल से सरकार को हर साल 19 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है जबकि इससे 1.48 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। कई वर्षों से सरकार से हम टोल पर बात कर रहे हैं, सबूत दे रहे हैं, सरकार हमारी बात से सहमत भी होती है लेकिन निर्णय नहीं लेती है।

सिंह के मुताबिक एक रिपोर्ट के मुताबिक टोल नाकों पर हर साल 60 हजार करोड़ रुपये का घोटाला होता है। देश के विकास के लिए इसे रोकना बहुत जरूरी है। इसके लिए नैशनल परमिट की तरह सरकार टोल टैक्स का परमिट दे सकती है जिससे सरकारी राजस्व बढ़ेगा और समय की बर्बादी से होने वाले लाखों करोड़ रुपये के नुकसान में कमी आएगी।

टोल के साथ डीजल की कीमतों बढ़ोतरी और हर दिन कीमतों में उतार चढ़ाव के कारण ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। डीजल व टोल ट्रक के परिचालन लागत का 70 फीसदी है और यह जीएसटी के दायरे से बाहर है। बॉम्बे गुड्स ट्रासपोर्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रवक्ता महेंद्र आर्य कहते हैं कि हमने हमेशा सरकार का समर्थन किया है। नोटबंदी जैसे कठिन दौर में भी सभी ट्रांसपोर्ट सरकार के साथ खड़े रहे। लेकिन जीएसटी के अंतर्गत अलग अलग नीतियों से ट्रक चालकों में घबराहट का माहौल बन रहा है और सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

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