सोशल मीडिया वार से चिंतित सरकार

सुशील मिश्र | मुंबई Oct 17, 2017 09:57 PM IST

सोशल मीडिया की सबसे बड़ी खिलाड़ी भारतीय जनता पार्टी को अब सोशल मीडिया ही परेशान करने लगी है। सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए निजी कंपनियों की नियुक्ति और 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च किए जाने की सोशल मीडिया में हो रही खिंचाई से परेशान होकर महाराष्ट्र सरकार को स्पष्टीकरण देना पड़ा है। राज्य सरकार के मुताबिक सूचना एवं जनसंपर्क का बजट महज 50 करोड़ रुपये का है और सोशल मीडिया पर आ रही खबरें झूठी हैं। सोशल मीडिया के वार से विचलित राज्य सरकार की सफाई पर विपक्षी दलों के साथ भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी इसके लिए जिम्मेदार भाजपा को बता रहे हैं।
 
महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए निजी कंपनियों को 300 करोड़ रुपये में नियुक्ति की सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है। इस पर जनसंपर्क महासंचालनालय के सचिव एवं महानिदेशक ब्रजेश सिंह ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को सर्वसाधारण तक पहुंचाने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय द्वारा विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रकार जनहित के निर्णयों तथा योजनाओं को साधारण जनता तक पहुंचाना किसी भी तरह से प्रचार करना नहीं है। सोशल मीडिया पर होने वाली टिप्पणियों से इसका कोई संबंध बताना गलत है। यह महासंचालनालय की नियमित प्रक्रिया है। 
 
प्रचार माध्यमों द्वारा जनजागृति करने, जनता तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यावसायिक संस्थाओं की सहायता लेने के लिए नियुक्ति की गई पुरानी सूची की अवधि समाप्त हो जाने पर नई व्यावसायिक संस्थाओं की सूची तैयार की गई है। इसके पहले 10 संस्थाओं की नियुक्ति की गई थी। हालांकि अभी तक नई सूची में शामिल किसी भी संस्था को कोई काम नहीं दिया गया है।  सिंह के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और राज्य सरकार की नीति के तहत यह काम अब सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के द्वारा केंद्रीय पद्धति के तहत किया जाता है। सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का काम सरकार ने सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय को सौंपा है। महासंचालनालय ने पूरी पारदर्शिता रखते हुए निविदा मंगाकर अनुभव वाली संस्थाओं का चयन किया है जो कि नियमित प्रक्रिया है।
 
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