गरमा धान को कम बारिश का गम

आर कृष्णा दास | रायपुर Oct 23, 2017 09:38 PM IST

बारिश की कमी और सूखे की गंभीर स्थिति के बीच धान का कटोरा कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ में ग्रीष्मकालीन धान की पैदावार पर असर पड़ सकता है। बारिश कम होने से छत्तीसगढ़ के अधिकांश जलाशय में पानी का स्तर औसत से भी नीचे चला गया है। रबी में 18 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई होती है वहीं ग्रीष्मकालीन धान की बुआई करीब 2 लाख हेक्टयर में की जाती है। पानी की कमी को देखते हुए राज्य सरकार किसानों को धान की बुआई कम करने के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रही है।

 
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, 'सिंचाई विभाग को ग्रीष्मकालीन और रबी धान की बुआई की जगह किसानों को तिलहन और दलहन फसलों की बुआई के लिए प्रोत्साहित करने का व्यापक अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है।' किसानों को भी इस बारे में जागरूक किया जाएगा। विभाग को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह किसानों को तिलहन और दलहनी फसलों के बीजों की मिनी-किट की पर्याप्त मात्रा में आापूर्ति सुनिश्चित करे। छत्तीसगढ़ सरकार ने 156,000 मिनी-किट वितरण करने का लक्ष्य रखा है, वहीं उसने केंद्र से तिलहन और दलहनी फसलों के लिए 4 लाख मिनी-किट मुहैया कराने का आग्रह किया है। ग्रीष्मकालीन या गरमा धान की बुआई आमतौर पर दिसंबर के अंत में शुरू होती है। राज्य के मुख्य सचिव विके धांड ने सुर्कलर जारी कर सभी संभागीय आयुक्तों और जिला कटेक्टरों को निर्देश दिया है कि वह गरमा धान की बुआई को हतोत्साहित करें। 
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