कम कर संग्रह से यूपी सरकार की बढ़ी चिंता

बीएस संवाददाता | लखनऊ Oct 23, 2017 09:45 PM IST

किसानों की कर्जमाफी और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बोझ तले दबी उत्तर प्रदेश सरकार को चालू वित्त वर्ष में कम राजस्व वसूली परेशान कर रही है। चालू वित्त वर्ष में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद वाणिज्य कर विभाग की वसूली में तो सुधार हुआ है लेकिन स्टांप शुल्क, आबकारी और खनन जैसे प्रमुख राजस्व की मदों में वसूली में कमी आई है। जीएसटी के दायरे से बाहर रखे गए डीजल, पेट्रोल पर सरकार वैट वसूलती है। सरकार की चिंता डीजल, पेट्रोल पर मिलने वाले वैट में आई कमी को लेकर भी है। सितंबर तक प्रदेश सरकार ने इस मद में तय किए गए कुल लक्ष्य का 41 फीसदी ही वसूल पाई है। प्रदेश सरकार ने इस बार वाणिज्य कर संग्रह का लक्ष्य 65,000 करोड़ रुपये रखा है जबकि सितंबर तक इस मद में 27,000 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि उद्योगों द्वारा डीजल-पेट्रोल की खपत में आई कमी इसका प्रमुख कारण है।
 
दूसरी ओर नोटबंदी के बाद से मंदी की चपेट में आए रियल एस्टेट क्षेत्र की हालात में अब तक सुधार नहीं हो सका है। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन के मद में प्रदेश सरकार ने इस वित्त वर्ष में 17,500 करोड़ रुपये की वसूली का लक्ष्य रखा है जबकि सितंबर तक केवल 6,500 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं जो कि लक्ष्य का 31 फीसदी है। योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद लाई गई खनन नीति में राजस्व का लक्ष्य तो दोगुना कर दिया गया है मगर कर संग्रह के मामले में अब तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में खनन क्षेत्र से 3,200 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य रखा है जबकि सितंबर तक की कर संग्रह महज 950 करोड़ रुपये रहा।
 
हालांकि परिवहन विभाग व मंडी परिषद ने तय लक्ष्य से बेहतर राजस्व की वसूली की है लेकिन इसकी रफ्तार को आने वाले महीनों में बनाए रखाना प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में मंडी शुल्क व परिवहन विभाग के लिए तय लक्ष्य के लगभग आधे की वसूली की है। राजस्व वसूली की सुस्त रफ्तार से चिंतित वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव आरके तिवारी ने निर्देश जारी कहा है कि लक्ष्य से कम वसूली करने वाले अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा और उनके खिलाफ कारवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार ने राजस्व बकाये की वसूली में तेजी लाने के लिए हर जोन के 100 बड़े बकायेदारों की सूची बनाने और राजस्व न जमा करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कारवाई करने का निर्देश दिया है।
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