एनटीपीसी को बिजलीघर देगा बिहार

सत्यव्रत मिश्रा | पटना Oct 24, 2017 09:55 PM IST

बिहार सरकार ने अपने सभी बिजलीघरों को एनटीपीसी को सौंपने का फैसला लिया है। इसके लिए राज्य सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के साथ करार करने वाली है। वहीं, राज्य सरकार ने बिहार में अब नए बिजलीघरों का निर्माण नहीं करने का भी फैसला लिया है। राज्य सरकार के स्वामित्व वाली इस वक्त तीन बिजलीघर हैं। इसमें से नबीनगर और कांटी बिजली परियोजनाओं का परिचालन पहले से ही एनटीपीसी के हाथों में है। इन दोनों बिजलीघरों के निर्माण, पुनर्निर्माण और विस्तार में एनटीपीसी पहले से साझेदार थी। करीब 2,000 मेगावॉट वाले नबीनगर बिजलीघर में एनटीपीसी की करीब आधी हिस्सेदारी है, जबकि 600 मेगावॉट कांटी बिजली परियोजना के पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी एनटीपीसी के पास थी। अब राज्य सरकार ने बरौनी स्थित अपने बिजलीघर को भी एनटीपीसी को सौंपने का फैसला लिया है। 
 
राज्य के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया, 'सभी बिजलीघरों को एनटीपीसी को सौंपने का फैसला लिया है। इसके लिए हम जल्दी कंपनी के साथ एक समझौता करने वाले हैं। इसके बाद हम बरौनी स्थित बिजलीघर को भी एनटीपीसी को सौंप देंगे। दरअसल, इस कंपनी के पास बिजलीघरों को संचालित करने की क्षमता और विशेषज्ञता दोनों है। कंपनी पहले से ही राज्य में बाढ़, कहलगांव और दूसरे बिजलीघरों का संचालन कर रही है। इसीलिए हमने अपने सभी बिजलीघरों को इस कंपनी के हाथों में देने का फैसला लिया है।' 
 
बरौनी बिजलीघर में राज्य सरकार का पूर्ण स्वामित्व है। इसकी 110-110 मेगावॉट की दोनों ईकाइयों के मरम्मत का काम पूरा हो चुका है और इससे बिजली की आपूर्ति भी शुरू हो चुकी है। वहीं इस बिजलीघर का विस्तार भी राज्य सरकार करा रही है। इसके तहत राज्य सरकार 250-250 मेगावॉट की दो ईकाई स्थापित करवा रही है। यह परियोजना भी अगले साल मार्च तक पूरी हो जाएगी। इसके लिए बीएचईएल के साथ राज्य सरकार ने करार किया है। इस परियोजना पर सरकार ने करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा राज्य सरकार ने नए बिजलीघरों का निर्माण नहीं करने का भी फैसला लिया है। मोदी ने कहा, 'हमारे पास बिजलीघरों के निर्माण और संचालन की क्षमता नहीं है। इसीलिए हमने इस बारे में अब आगे कोई नया निर्माण नहीं करने का फैसला लिया है।' 
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