वैश्विक पहचान की ओर बस्तर का साठका

बीएस संवाददाता | जगदलपुर Nov 30, 2017 09:55 PM IST

हैदराबाद में वैश्विक आदिवासी उद्यमिता सम्मेलन में बस्तर का चावल प्रदर्शन के लिए ले जाया गया है। वैश्विक उत्पादन लॉन्च सत्र के लिए लगे स्टॉल में रेड राइस (साठका) के साथ ही आम प्रचलन से लगभग बाहर हो गए लघु धान फसलों कोसरा यानी कुटकी और कोदो भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने के लिए लाया गया है।  बस्तर के लोगों की जीवनशैली में शामिल साठका चावल को मोटा अनाज मानकर शहरी लोगों ने चलन से बाहर कर दिया। औषधीय गुण वाले साठका चावल अब हैदराबाद सहित देश के 150 से अधिक शहरों में बस्तर के प्रतिनिधि के रूप में सामने आ रहा है। दंतेवाड़ा जिले के किसानों की कंपनी भूमगादी ने जैविक चावल उत्पाद आदिम के नाम से इस रेड राइस की ब्रांडिंग की है। भूमगादी ने इस जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और ब्रांडिंग का काम शुरू किया है जिससे अब इन उत्पादों की बिक्री दिल्ली, चंडीगढ़, उदयपुर, बेंगलूरु, चेन्नई, भोपाल और रायपुर में हो रही है। 
 
कलेक्टर सौरभ कुमार ने बताया कि दंतेवाड़ा के जैविक उत्पादों के अलावा कड़कनाथ समेत अन्य उत्पादों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। आयुर्वेद में साठका का जिक्र षष्टिका के नाम से किया गया है जो पोषक व औषधीय गुणों से भरपूर होने की वजह से गर्भवती महिलाओं, किशोरी बालिकाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। आम चावल की तुलना में 2 से 3 गुना जिंक और आयरन, काफी मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट व फाइबर से भरपूर है। 
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