मध्य प्रदेश में अक्षय ऊर्जा डेवलपरों को राहत

श्रेया जय | नई दिल्ली Dec 05, 2017 09:42 PM IST

अक्षय ऊर्जा स्रोतों को मेरिट ऑर्डर डिस्पैच से रियायत

मध्य प्रदेश में अक्षय ऊर्जा उद्यमों को राहत मिली है। राज्य में राज्य बिजली नियामक ने अक्षय ऊर्जा स्रोतों को मेरिट ऑर्डर डिस्पैच से रियायत दे दी है। इसके साथ ही अक्षय ऊर्जा स्रोतों के लिए मस्ट रन स्टेटस दोबारा बहाल हो गया है। मध्य प्रदेश बिजली नियामक आयोग (एमपीईआरसी) के एक आदेश में कहा गया है, 'सह-उत्पादन और अक्षय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादन शिड्यूलिंग की जद में आएगा। पवन, सौर ऊर्जा, लघु जल आदि मेरिट ऑर्डर डिस्पैच की जद में नहीं आएंगे।'

अक्षय ऊर्जा को देश भर में मस्ट रन दर्जा प्राप्त है, जिसका मकसद इनका ग्रिड के साथ जुड़ाव और डेवलपरों को बेहतर प्रतिफल सुनिश्चित करना है। ताप बिजली परियोजनाएं बंद करना और तत्काल शुरू करना मुश्किल होता है, इसलिए मांग कम होने की स्थिति में सबसे पहले अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में उत्पादन रोकना होता है।

मध्य प्रदेश ने इस साल अगस्त में एक मसौदा आदेश जारी कर अक्षय ऊर्जा का मस्ट रन दर्जा वापस ले लिया था। इसके बाद राज्य को प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। अक्षय ऊर्जा उद्योग के प्रतिनिधियों से मिलने के बाद एमपीईआरसी ने अपना रुख बदल लिया। बाद में तमिलनाडु और राजस्थान में अक्षय ऊर्जा परियोजना डेवलपर उत्पादन बंद होने की स्थिति का सामना कर रहे थे और इससे परेशान होकर उन्होंने बिजली आयोग के समक्ष अपनी बात रखी।

हालांकि अक्षय ऊर्जा बिजली उत्पादकों को अब व्हीलिंग, ट्रांसमिशन, क्रॉस सब्सिडी शुल्क आदि का भुगतान करना होगा। इससे मध्य प्रदेश में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को नुकसान हो सकता है। मध्य प्रदेश बिजली उत्पादकों को अतिरिक्त शुल्कों से छूट देने की पेशकश करने वाला पहला राज्य था और इसी वजह से पिछले कुछ सालों में कम दरों पर बात बनी थी।
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