यूपीडीपीएल पर आखिर लग गया ताला

बीएस संवाददाता | लखनऊ Dec 05, 2017 09:45 PM IST

लंबे समय से वित्तीय नुकसान में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की दवा कंपनी यूपी ड्रग्स एवं फार्मास्यूटिकल लिमिटेड (यूपीडीपीएल) में आखिरकार ताला लग गया है। पिछले लगभग पांच साल से कंपनी में दवा का उत्पादन बंद हो चुका था और अब प्रदेश सरकार की ओर से इसे ऑर्डर नहीं दिए जा रहे हैं।  यूपीडीपीएल की 49 एकड़ जमीन प्रदेश सरकार ने आईटी विभाग को देने का फैसला किया है। हालांकि प्रदेश के उद्यमी लंबे समय से इस जगह का उपयोग फार्मा पार्क के तौर पर करने की मांग कर रहे थे। कंपनी अधिकारियों के मुताबिक प्रदेश सरकार ने यूपीडीपीएल को अंतिम रुप से बंद करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस बारे में अखिलेश सरकार ही फैसला ले चुकी थी और योगी सरकार ने भी इस पर मुहर लगा दी। यहां कार्यरत सभी कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) देने का फैसला लिया गया है। वर्तमान में यूपीडीपीएल में करीब 140 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिन्हें 50 महीने के वेतन का भुगतान जल्दी ही किया जाएगा। यूपीडीपीएल की जमीन के एवज में आईटी विभाग प्रदेश सरकार को 50 करोड़ रुपये हस्तांतरित करेगा, जिससे कर्मचारियों के बकाया वेतन के भुगतान के अलावा वीआरआस की राशि दी जाएगी।
 
सरकारी अस्पतालों को गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति के लिए 1978 में पिकप और भारत सरकार की पूंजी से यूपीडीपीएल की स्थापना की गयी थी। कंपनी में बनी ज्यादातर दवाओं की सरकारी खरीद की जाती थी। प्रदेश सरकार ने 1987 में दवा खरीद नीति बदलने का निर्णय लिया, जिसके बाद यह नुकसन में चलने लगी। पहली बार इसे 1992 में बीमार घोषित किया गया था। प्रदेश सरकार ने 2002 में इसके पुर्नवास के लिए 25 करोड़ रुपये दिए थे और 2007 में इसे स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण में दे दिया गया था।
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