संसदीय सचिव की परिपाटी कांग्रेस की देन!

आर कृष्णा दास |  Jan 22, 2018 09:59 PM IST

संसदीय सचिव की अवधारणा जिसके कारण दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिया गया है और छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असमंजस में है, उसे सबसे पहले कांग्रेस ने अविभाजित मध्यप्रदेश में लागू किया था। आप के अयोग्य घोषित 20 विधायक संसदीय सचिव के तौर पर लाभ के पद पर थे। लेकिन यह पहली पार्टी नहीं है जिसने संसदीय सचिव नियुक्त किए हैं। कांग्रेस ने भी दिल्ली में संसदीय सचिव नियुक्त किया था लेकिन इसकी अवधारणा सबसे पहले मध्य प्रदेश में 1960 के दशक में पेश की गई थी।
 
अविभाजित मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने 1967 में पहला संसदीय सचिव नियुक्त किया था। 1977 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान संसदीय सचिव रहे वीरेंद्र पांडेय ने कहा, 'डीपी मिश्रा के मुख्यमंत्री रहने के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठï विधायक राजेंद्र प्रसाद शुक्ला को पहली बार संसदीय सचिव नियुक्त किया गया था।' शुरुआत में संसदीय सचिव की नियुक्ति मुख्यमंत्री या वरिष्ठï मंत्रियों के काम में मदद के लिए किया जाता था। लेकिन अब संसदीय सचिव की नियुक्ति संविधान के 91वें संशोधन में केंद्र और राज्यों के मंत्रिमंडल की संख्या तय कर देने के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए की जाती है। संविधान संशोधन के द्वारा लोक सभा या राज्य विधानसभा  के कुल सदस्यों के 15 फीसदी से ज्यादा सदस्य मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं हो सकते। तत्कालीन मध्य प्रदेश सरकार ने इसके लिए औपचारिक तौर पर एक कानून बनाकर सरकार को संसदीय सचिवों कको नियुक्त करने और उस पद को गैर-लाभ का पद घोषित करने का अधिकार दिया। यही कानून छत्तीसगढ़ सरकार के 11 संसदीय सचिवों के लिए राहत लेकर आया है।
 
भाजपा प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने कहा, 'यह नियुक्ति वैध है और सरकार ने कानून के दायरे में रहकर काम किया है।' कांग्रेस नेताओं द्वारा इस मामले को अदालत में चुनौती दी गई थी, जिससे यह मामला अभी छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में लंबित है। याचियों में से एक एआईसीसी के प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने कहा कि वह कथित तौर पर लाभ के पद पर रहने के लिए 11 भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के लिए चुनाव आयोग गए थे। उन्होंने कहा कि लेकिन राज्यपाल ने कार्रवाई नहीं की और कांग्रेस की शिकायतों को आयोग के पास नहीं भेजा गया। अकबर ने कहा कि 1967 में हालात उस समय काफी अलग थे जब संसदीय सचिव की नियुक्ति की गई थी। जहां कांग्रेस मजबूती के साथ इसका विरोध कर रही है, वहीं भाजपा छत्तीसगढ़ में नियमों के तहत फंसी हुई है क्योंकि वह दिल्ली में आप विधायकों को अयोग्य घोषित कराने के लिए शिकायतकर्ता रही है। 
कीवर्ड chattisgarh, office, profit, BJP, aap,

  
X

शेयर बॉक्स

पर्मलिंक